14वें पंजाब एसआईपी एबेकस कॉम्पिटिशन में 1,400 स्टूडेंट्स ने मेंटल अरिथमेटिक स्किल्स का किया प्रदर्शन, हुआ जोरदार मुकाबला

• एडवांस लेवल के प्रतिभागियों ने दी गति, सटीकता और एकाग्रता की परीक्षा; 140 विद्यार्थियों ने पूरा किया एसआईपी एबेकस कार्यक्रम
चंडीगढ़, 25 अक्टूबर: 
पंजाब, हिमाचल प्रदेश और चंडीगढ़ ट्राइसिटी के करीब 1400 विद्यार्थियों ने रविवार को आयोजित 14वीं पंजाब एसआईपी एबेकस एवं मानसिक गणना प्रतियोगिता में हिस्सा लिया। प्रतियोगिता के दौरान विद्यार्थियों ने मानसिक गणना के साथ अपनी गति, सटीकता और एकाग्रता की क्षमता को परखा।
प्रतियोगिता का प्रमुख आकर्षण एडवांस लेवल की चुनौती रही, जिसमें प्रतिभागियों को महज 11 मिनट में अंकगणित के 260 सवाल हल करने थे। इस चुनौती में विद्यार्थियों की गणना की गति और सटीकता के साथ ही एकाग्रता तथा दबाव में बेहतर प्रदर्शन करने की क्षमता भी परखी गई।
प्रतियोगिता में पंजाब, हिमाचल प्रदेश और चंडीगढ़ ट्राइसिटी के विभिन्न क्षेत्रों से आए विद्यार्थियों को बड़े प्रतिस्पर्धी माहौल में अपनी क्षमताओं को परखने का अवसर मिला। इस दौरान एसआईपी एबेकस कार्यक्रम के विभिन्न स्तरों को सफलतापूर्वक पूरा करने वाले 140 विद्यार्थियों ने स्नातक स्तर की उपलब्धि हासिल की।
प्रतियोगिता दो चरणों में आयोजित की गई। इस अवसर पर पंचकूला नगर निगम के मेयर शाम लाल बंसल, चंडीगढ़ प्रशासन के पर्यटन एवं संस्कृति सचिव तथा सिटको के प्रबंध निदेशक डॉ. सैयद आबिद रशीद शाह और पंजाब सरकार के बिजली विभाग की विशेष सचिव डॉ. सैयद सेहरिश असगर ने विद्यार्थियों से संवाद कर उनका उत्साह बढ़ाया।
एसआईपी एबेकस पंजाब के स्टेट हेड जगदीप सिंह ने कहा कि यह उत्तर भारत में अपनी तरह की बड़ी एबेकस एवं मानसिक गणना प्रतियोगिताओं में से एक है। उन्होंने कहा, “ऐसी प्रतियोगिताएं केवल बच्चों की मानसिक गणना क्षमता को परखने तक सीमित नहीं रहतीं, बल्कि उन्हें कम उम्र में ही प्रतिस्पर्धी माहौल का अनुभव भी कराती हैं। बड़ी संख्या में अपने हमउम्र विद्यार्थियों के साथ प्रतिस्पर्धा करने से बच्चों को यह समझने का अवसर मिलता है कि वे दबाव में कैसा प्रदर्शन करते हैं। इससे उनमें आत्मविश्वास और आगे बढ़ने की प्रेरणा भी विकसित होती है। हमारा उद्देश्य बच्चों को ऐसा सार्थक अनुभव और अवसर देना है, जो उनके समग्र विकास में सहायक हो।”
एसआईपी एबेकस एक व्यवस्थित एबेकस आधारित मानसिक गणना कार्यक्रम है। इसकी शुरुआत वर्ष 1999 में मलेशिया में हुई थी और वर्ष 2003 में इसे भारत में शुरू किया गया। चरणबद्ध प्रशिक्षण और नियमित अभ्यास के माध्यम से यह कार्यक्रम बच्चों की संख्यात्मक एवं मानसिक गणना क्षमता के साथ गति, सटीकता, एकाग्रता, कल्पना शक्ति और आत्मविश्वास विकसित करने पर केंद्रित है।

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