चंडीगढ़ : 23 जुलाई 2026: मानवता और करुणा का अनुपम उदाहरण प्रस्तुत करते हुए भारतीय सेना के नायब रिसालदार वीरेंद्र सिंह के परिवार ने उनके ब्रेन डेड घोषित किए जाने के पश्चात उनके अंग दान किए। उन्हें 21 जुलाई 2026 को कमांड अस्पताल, पश्चिमी कमान, चंडीमंदिर में ब्रेन डेड घोषित किया गया।
नायब रिसालदार वीरेंद्र सिंह लद्दाख के 16,000 फीट की ऊंचाई वाले दुर्गम क्षेत्र में तैनाती के दौरान ब्रेन स्ट्रोक का शिकार हो गए थे। उन्हें तत्काल प्राथमिक चिकित्सा प्रदान की गई तथा एयर एम्बुलेंस के माध्यम से 16 जुलाई 2026 को कमांड अस्पताल (पश्चिमी कमान), चंडीमंदिर लाया गया, किंतु चिकित्सकों के अथक प्रयासों के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका।
अत्यंत गहरे व्यक्तिगत दुःख के बीच उनकी पत्नी श्रीमती कुसुम ने अद्भुत साहस और संवेदनशीलता का परिचय देते हुए उनके अंगदान का निर्णय लिया। इस निर्णय के तहत दो किडनी, यकृत (लिवर), दोनों फेफड़े तथा दोनों कॉर्निया सहित कुल सात अंगों एवं ऊतकों का सफलतापूर्वक प्रत्यारोपण किया गया, जिससे देश के विभिन्न अंग प्रत्यारोपण की प्रतीक्षा कर रहे मरीजों को नया जीवन मिला। विशेष रूप से, कमांड अस्पताल (पश्चिमी कमान) के इतिहास में यह पहला अवसर है जब फेफड़ों का सफल निष्कर्षण किया गया, जो अस्पताल की उन्नत चिकित्सा क्षमता और तकनीकी दक्षता का महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।
राष्ट्रीय अंग एवं ऊतक प्रत्यारोपण नेटवर्क के माध्यम से इन अंगों का आवंटन पात्र मरीजों को किया गया। एक किडनी तथा दोनों कॉर्निया का प्रत्यारोपण कमांड अस्पताल (पश्चिमी कमान) में किया गया। दूसरी किडनी हरियाणा राज्य अंग एवं ऊतक प्रत्यारोपण संगठन (एसओटीटीओ), हरियाणा को भेजी गई, यकृत को आर्मी अस्पताल (रिसर्च एंड रेफरल), नई दिल्ली तथा दोनों फेफड़ों को केआईएमएस, हैदराबाद भेजा गया। अंगों के समयबद्ध एवं सुरक्षित परिवहन के लिए सैन्य पुलिस, नागरिक प्रशासन तथा स्थानीय प्राधिकरणों के समन्वय से ग्रीन कॉरिडोर स्थापित किया गया।
भारतीय सेना नायब रिसालदार वीरेंद्र सिंह के सर्वोच्च बलिदान तथा श्रीमती कुसुम के इस निस्वार्थ एवं प्रेरणादायी निर्णय को विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करती है। उनका यह मानवीय योगदान करुणा, साहस और सेवा-भाव का अनुपम उदाहरण है, जो समाज में अधिक से अधिक लोगों को अंगदान के लिए प्रेरित करेगा।
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