बेटियां ही सबसे बड़ी दौलत हैं, इससे बड़ा कोई दहेज नहीं हो सकता - पूर्व सरपंच नरेश पूनिया; शादी में भी नहीं लेंगे दहेज, दोनों बेटे कन्या भ्रूण हत्या के खिलाफ लेंगे प्रतीकात्मक आठवां फेरा
हिसार के गांव सतरोड़ कलां के पूर्व सरपंच नरेश पूनिया ने अपने दोनों पुत्रों की रिंग सेरेमनी मात्र एक रुपये में संपन्न कर समाज को सादगी, दहेज मुक्त विवाह, बेटी सम्मान और पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि बहू बनकर आने वाली बेटियां ही उनके परिवार की सबसे बड़ी पूंजी हैं।
बुधवार को हिसार-तोशाम रोड स्थित रॉयल पॉल रिसोर्ट में आयोजित समारोह में गांव सतरोड़ कलां के पूर्व सरपंच नरेश पूनिया ने अपने दोनों पुत्रों अजय और विजय की रिंग सेरेमनी सादगी के साथ मात्र एक रुपये में संपन्न कर समाज के सामने एक अनूठी मिसाल पेश की। समारोह के दौरान दोनों बेटों ने पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लिया तथा लोगों से अधिक से अधिक पौधे लगाने और प्रकृति की रक्षा करने का आह्वान किया।
समारोह में बड़ी संख्या में ग्रामीण, मित्र और रिश्तेदार शामिल हुए तथा नवयुगलों को शुभाशीष प्रदान किया। खुशी के इस अवसर पर पूर्व सरपंच नरेश पूनिया और उनकी पत्नी सुशीला देवी भी पारिवारिक सदस्यों के साथ उत्साहपूर्वक झूमते नजर आए।
पूर्व सरपंच नरेश पूनिया ने कहा, "जो बेटियां बहू बनकर हमारे घर आ रही हैं, वही हमारी सबसे बड़ी दौलत हैं। इससे बड़ा कोई दहेज हो ही नहीं सकता। हमें किसी प्रकार के शगुन या उपहार की आवश्यकता नहीं है, हमें केवल मान-सम्मान चाहिए।"
उन्होंने कहा कि जब उनके बेटों का विवाह होगा, तब भी परिवार की ओर से किसी प्रकार का दहेज या ऐसा कोई शगुन स्वीकार नहीं किया जाएगा, जिससे समाज में दिखावे या आर्थिक बोझ को बढ़ावा मिले। उनका उद्देश्य समाज को यह संदेश देना है कि बेटियों का सम्मान ही सबसे बड़ा सम्मान है।
पूनिया ने कहा कि जिस परिवार ने अपनी बेटी का पालन-पोषण कर उसे संस्कार दिए हैं, वह उनके लिए सर्वोपरि है। उन्होंने कहा, "हमें फिजूलखर्ची छोड़कर बेटियों को आगे बढ़ाने की जरूरत है। उन्हें इतना सक्षम, शिक्षित और आत्मनिर्भर बनाना चाहिए कि समाज को यह एहसास हो कि बेटियां किसी से कम नहीं हैं, बल्कि वे परिवार और समाज का सबसे बड़ा उपहार हैं।"
उन्होंने बताया कि अभी दोनों बेटों के विवाह की तिथि निर्धारित नहीं हुई है। जैसे ही शादी की तारीख तय होगी, दोनों बेटे विवाह के दौरान कन्या भ्रूण हत्या के विरोध और 'बेटी बचाओ' का संदेश देने के लिए पारंपरिक सात फेरों के साथ एक प्रतीकात्मक आठवां फेरा भी लेंगे।
पूर्व सरपंच नरेश पूनिया ने समाज से आह्वान करते हुए कहा कि विवाह जैसे पावन अवसरों को सादगी के साथ मनाया जाए, दहेज प्रथा और फिजूलखर्ची जैसी कुरीतियों से दूर रहा जाए तथा बेटियों को शिक्षा, सम्मान और समान अवसर देकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाया जाए। उन्होंने कहा कि यही समाज और आने वाली पीढ़ी के लिए सबसे बड़ा उपहार होगा।
पूर्व सरपंच नरेश पूनिया की इस पहल की क्षेत्रभर में सराहना हो रही है। लोग इसे दहेज मुक्त विवाह, बेटी सम्मान, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक जागरूकता की दिशा में एक प्रेरणादायक एवं अनुकरणीय पहल मान रहे हैं।

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