पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड में महिला कर्मचारियों से कथित धक्केशाही! गर्भवती महिलाओं को भी राहत नहीं? भाजपा नेता हरदेव सिंह उभ्भा ने मांगी CBI जांच

महिला कर्मचारियों से मजदूरी जैसे काम करवाने, विरोध करने वालों के दूर-दराज तबादले और कथित अवैध भर्तियों के आरोपों से मचा विवाद; महिला आयोग में शिकायत न लिए जाने पर भी उठाए सवाल

चंडीगढ़। पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड एक बार फिर विवादों के घेरे में है। बोर्ड के चेयरमैन पर महिला कर्मचारियों के साथ कथित दुर्व्यवहार, पद की गरिमा के विपरीत काम करवाने और विरोध करने वाले कर्मचारियों को दूर-दराज क्षेत्रों में तबादले के जरिए परेशान करने जैसे गंभीर आरोप लगे हैं। भाजपा पंजाब के वरिष्ठ नेता सरदार हरदेव सिंह उभ्भा ने इन आरोपों को लेकर पंजाब सरकार से जवाब मांगा है और पूरे मामले की केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) से स्वतंत्र जांच करवाने की मांग की है।
उभ्भा ने आरोप लगाया कि बोर्ड में महिला कर्मचारियों से उनके विभागीय दायित्वों से अलग मजदूरी जैसे काम करवाए जा रहे हैं। सबसे गंभीर आरोप यह है कि गर्भवती महिला कर्मचारियों को भी कथित तौर पर उनकी स्वास्थ्य परिस्थितियों के अनुरूप राहत और सुविधाएं नहीं दी जा रही हैं।

अनुचित आदेशों का विरोध किया तो दूर-दराज तबादले का आरोप

भाजपा नेता के मुताबिक, बोर्ड में जो कर्मचारी कथित अनुचित आदेशों का पालन करने से इनकार करते हैं, उन्हें दूर-दराज क्षेत्रों में तबादला करके मानसिक रूप से परेशान किया जाता है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या सरकारी संस्थानों में कर्मचारियों के साथ इस तरह का व्यवहार स्वीकार्य हो सकता है?

कथित अवैध भर्तियों पर भी उठाए सवाल, CBI जांच की मांग

मामला केवल कर्मचारियों के साथ कथित दुर्व्यवहार तक सीमित नहीं है। सरदार हरदेव सिंह उभ्भा ने बोर्ड में हुई कथित गैर-कानूनी भर्तियों, नियुक्तियों और संदिग्ध प्रशासनिक फैसलों की भी जांच की मांग उठाई है।

उन्होंने कहा कि चेयरमैन के कार्यकाल में हुई भर्तियों और नियुक्तियों से जुड़े रिकॉर्ड की स्वतंत्र एजेंसी से जांच होनी चाहिए। यदि किसी भी स्तर पर नियमों का उल्लंघन या अनियमितता सामने आती है तो जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए।
महिला आयोग में शिकायत तक नहीं लेने का आरोप, फिर महिलाओं को न्याय कैसे मिलेगा?

इस पूरे मामले में एक और गंभीर सवाल पंजाब महिला आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर उठाया गया है। उभ्भा ने दावा किया कि पीड़ित महिलाओं की शिकायत लेकर आयोग पहुंचने पर वहां के स्टाफ ने कथित तौर पर शिकायत आवेदन स्वीकार करने से इनकार कर दिया।

उन्होंने मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान और पंजाब महिला आयोग से सवाल किया कि जब पीड़ित महिलाओं की शिकायत ही नहीं सुनी जाएगी तो उन्हें न्याय कैसे मिलेगा? क्या सरकारी संस्थानों में महिलाओं की शिकायतों को सुनना और उन पर कार्रवाई सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी नहीं है?

सरकार के सामने रखीं पांच प्रमुख मांगें

सरदार उभ्भा ने मांग की है कि:

1. पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड में हुई कथित अवैध भर्तियों और संदिग्ध प्रशासनिक फैसलों की CBI जांच करवाई जाए।
2. महिला कर्मचारियों से कथित तौर पर मजदूरी जैसे काम करवाने के मामले की जांच हो।
3. गर्भवती महिला कर्मचारियों को नियमानुसार स्वास्थ्य, सुरक्षा और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध करवाई जाएं।
4. विरोध करने वाले कर्मचारियों को तबादलों के जरिए कथित रूप से परेशान करने के मामलों की निष्पक्ष जांच हो।
5. पंजाब महिला आयोग शिकायत स्वीकार कर पीड़ित महिलाओं की सुनवाई सुनिश्चित करे।

अंत में उभ्भा ने कहा कि सरकारी कर्मचारी किसी अधिकारी के निजी आदेशों का पालन करने वाले गुलाम नहीं हैं, बल्कि सरकारी व्यवस्था की रीढ़ हैं। पंजाब सरकार को इस मामले में अपनी जवाबदेही निभाते हुए निष्पक्ष जांच और पारदर्शी कार्रवाई सुनिश्चित करनी चाहिए।

अब बड़ा सवाल यह है कि पंजाब सरकार और पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड इन गंभीर आरोपों पर क्या जवाब देते हैं? क्या मामले की स्वतंत्र जांच होगी या कर्मचारियों की शिकायतें इसी तरह अनसुनी रह जाएंगी?

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