शिमला: हिमाचल प्रदेश में इस बार मानसून सामान्य तिथि से करीब डेढ़ से दो सप्ताह की देरी से पहुंच सकता है। मौसम विज्ञान केंद्र शिमला के निदेशक डॉ. शोभित कटियार के अनुसार, फिलहाल मानसून के प्रवेश के स्पष्ट संकेत नहीं हैं, लेकिन जुलाई के पहले सप्ताह में इसके प्रदेश में पहुंचने की संभावना है।
प्रदेश में मानसून के प्रवेश की सामान्य तिथि 22 जून मानी जाती है। हालांकि, इस वर्ष इसके जुलाई के पहले सप्ताह तक पहुंचने के आसार हैं। इससे पहले वर्ष 2010 में सबसे देर से 10 जुलाई को मानसून ने हिमाचल में दस्तक दी थी।
मौसम विभाग के अनुसार, 27 से 30 जून तक प्रदेश के कुछ क्षेत्रों में हल्की बारिश हो सकती है। वहीं, 1 जुलाई से पश्चिमी विक्षोभ (वेस्टर्न डिस्टर्बेंस) के सक्रिय होने से मौसम करवट लेगा। इसे देखते हुए 1 से 3 जुलाई के बीच तेज बारिश, आंधी और तूफान का येलो अलर्ट जारी किया गया है। खासकर 3 जुलाई को प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में भारी बारिश की संभावना जताई गई है।
पिछले एक सप्ताह से रुक-रुक कर हो रही बारिश के कारण प्रदेश के अधिकांश क्षेत्रों में मौसम सुहावना बना हुआ है। अधिकतम और न्यूनतम तापमान सामान्य या उससे थोड़ा कम बना हुआ है। मौसम विभाग का अनुमान है कि 1 जुलाई के बाद तापमान में करीब 2 डिग्री सेल्सियस तक गिरावट आ सकती है।
जून महीने में अब तक हिमाचल में सामान्य से 32 प्रतिशत कम वर्षा दर्ज की गई है। 1 से 27 जून के बीच प्रदेश में सामान्यतः 84.3 मिमी बारिश होती है, जबकि इस बार केवल 57.2 मिमी वर्षा रिकॉर्ड की गई है। मौसम विभाग ने इस बार पूरे मानसून सीजन में भी सामान्य से कम बारिश होने का पूर्वानुमान जताया है।
इस बीच, बाहरी राज्यों से आए पर्यटकों का कहना है कि मैदानी इलाकों की भीषण गर्मी की तुलना में हिमाचल के पर्यटन स्थलों का मौसम बेहद सुखद है। उनका कहना है कि शिमला में बारिश होने के बाद मौसम और भी अधिक खुशनुमा हो जाता है, जिससे पर्यटकों का अनुभव बेहतर बनता है।
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