पांवटा साहिब में दशहरे पर पहली बार सुंदरकांड और सामूहिक हनुमान चालीसा पाठ का भव्य आयोजन

नगर परिषद खेल मैदान में उमड़े श्रद्धालु, जय श्रीराम और हनुमान जी के जयकारों से गूंजा परिसर; युवाओं को संस्कृति से जोड़ने का दिया संदेश

पांवटा साहिब: हिमाचल प्रदेश के पांवटा साहिब में दशहरे के पावन अवसर पर सुंदरकांड पाठ और सामूहिक हनुमान चालीसा पाठ का भव्य आयोजन किया गया। नगर परिषद खेल मैदान में आयोजित इस धार्मिक कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया। पूरे परिसर में भक्ति और श्रद्धा का माहौल देखने को मिला। कार्यक्रम के दौरान जय श्रीराम और हनुमान जी के जयकारों से मैदान गूंज उठा।

श्री खाटू श्याम सेवा समिति ने किया आयोजन

इस धार्मिक कार्यक्रम का आयोजन श्री खाटू श्याम सेवा समिति, पांवटा साहिब की ओर से किया गया। प्रसिद्ध कथावाचक केशव गर्ग और पदम गर्ग ने सुंदरकांड पाठ करवाया। इस दौरान श्रद्धालुओं ने सामूहिक रूप से हनुमान चालीसा का पाठ किया और भक्तिमय वातावरण में कथा का श्रवण किया।

प्रशासनिक अधिकारी और जनप्रतिनिधि रहे मौजूद

कार्यक्रम में पांवटा साहिब के एसडीएम, नगर परिषद के कार्यकारी अधिकारी, नगर परिषद के पार्षदों सहित कई गणमान्य लोगों ने शिरकत की। समिति के सदस्यों ने कार्यक्रम में पहुंचे अतिथियों का स्वागत किया। आयोजन में श्रद्धालुओं की भागीदारी ने धार्मिक उत्सव को विशेष बना दिया।

युवाओं को संस्कृति से जोड़ना आयोजन का उद्देश्य: विकास बालियान

समिति के सदस्य विकास बालियान ने बताया कि पांवटा साहिब में दशहरे के अवसर पर इस तरह का भव्य सुंदरकांड और सामूहिक हनुमान चालीसा पाठ पहली बार आयोजित किया गया। उन्होंने कहा कि ऐसे धार्मिक आयोजनों से लोगों में भक्ति भावना जागृत होती है और उन्हें धार्मिक कथाओं को सुनने व समझने का अवसर मिलता है।

उन्होंने कहा कि आज के समय में युवाओं को अपनी संस्कृति, परंपराओं और धार्मिक मूल्यों से जोड़ना बेहद जरूरी है। इस तरह के आयोजन नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक विरासत से परिचित करवाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

भक्तिमय माहौल में संपन्न हुआ कार्यक्रम

सुंदरकांड और सामूहिक हनुमान चालीसा पाठ के दौरान श्रद्धालु भक्ति में लीन नजर आए। आयोजन के माध्यम से धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक परंपराओं और सामूहिक सहभागिता का संदेश दिया गया। श्री खाटू श्याम सेवा समिति की इस पहल को पांवटा साहिब में धार्मिक गतिविधियों को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास के रूप में देखा गया।



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