हमीरपुर में RSS का पथ संचलन, स्वयंसेवकों ने कदम से कदम मिलाकर दिखाया अनुशासन

संघ के स्थापना के 101वें वर्ष में प्रवेश पर निकला पथ संचलन, गांधी चौक से भोटा चौक होते हुए बस स्टैंड तक पहुंचे स्वयंसेवक


हमीरपुर:
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के स्थापना दिवस और विजयदशमी के अवसर पर हमीरपुर शहर में पथ संचलन का आयोजन किया गया। इस दौरान स्वयंसेवकों ने कदम से कदम मिलाकर संगठन की एकजुटता और अनुशासन का परिचय दिया। पथ संचलन गांधी चौक से शुरू होकर भोटा चौक होते हुए बस स्टैंड तक पहुंचा। कार्यक्रम के माध्यम से स्वयंसेवकों ने अनुशासन, संगठनात्मक एकता और सामाजिक सहभागिता का संदेश दिया।

1925 में हुई थी RSS की स्थापना

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना वर्ष 1925 में विजयदशमी के दिन डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार ने की थी। वर्ष 2026 में संघ अपनी स्थापना के 101वें वर्ष में प्रवेश कर चुका है। संघ की परंपरा में विजयदशमी का विशेष महत्व है और इस अवसर पर देशभर में पथ संचलन सहित विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।

हमीरपुर में आयोजित पथ संचलन के दौरान संघ की शाखाओं, शारीरिक अभ्यास, बौद्धिक गतिविधियों और सामाजिक कार्यों के महत्व को भी रेखांकित किया गया।

पथ संचलन संघ की महत्वपूर्ण परंपरा: डॉ. चेतराम

इस अवसर पर ठाकुर राम सिंह शोध संस्थान, नेरी के निदेशक डॉ. चेतराम ने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की ओर से वर्ष 1926 से पथ संचलन की परंपरा निभाई जा रही है। उन्होंने कहा कि संघ के 100 वर्ष पूरे होने के साथ संगठन का विस्तार हुआ है और इसकी गतिविधियां भारत के साथ-साथ विदेशों तक भी पहुंची हैं।

डॉ. चेतराम ने कहा कि पथ संचलन संघ की एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया है, जिसमें स्वयंसेवक कदम से कदम मिलाकर चलते हैं। यह अनुशासन, सामूहिकता और संगठन के प्रति समर्पण को दर्शाता है।

सामाजिक बदलाव और सकारात्मक मूल्यों पर जोर

डॉ. चेतराम ने समाज में व्याप्त बुराइयों को दूर करने और सकारात्मक बदलाव लाने में संघ की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने सामाजिक सहभागिता और संगठनात्मक गतिविधियों के महत्व पर भी प्रकाश डाला।

विजयदशमी का पर्व बुराई पर अच्छाई की जीत और सत्य की स्थापना का प्रतीक माना जाता है। इसी अवसर पर आयोजित पथ संचलन के जरिए हमीरपुर में स्वयंसेवकों ने एकता, अनुशासन और सामाजिक जिम्मेदारी का संदेश दिया।

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