हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय में फीस बढ़ोतरी के खिलाफ SFI का मोर्चा, कथित वित्तीय अनियमितताओं की न्यायिक जांच की मांग
शिमला, 23 अगस्त 2026: स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) हिमाचल प्रदेश राज्य कमेटी ने हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय (HPU) में फीस बढ़ोतरी के फैसले का विरोध करते हुए विश्वविद्यालय में कथित वित्तीय एवं प्रशासनिक अनियमितताओं की स्वतंत्र न्यायिक जांच की मांग की है। संगठन का आरोप है कि नियम-विरुद्ध पदोन्नतियों और कथित वित्तीय अनियमितताओं का आर्थिक बोझ छात्रों पर फीस बढ़ाकर डालने की कोशिश की जा रही है।
SFI के अनुसार, मार्च 2026 में विश्वविद्यालय की कार्यकारिणी परिषद द्वारा फीस बढ़ोतरी का फैसला लिया गया था। संगठन तब से इस फैसले के खिलाफ आंदोलन कर रहा है। SFI का कहना है कि HPU एक राज्य द्वारा वित्तपोषित विश्वविद्यालय है और उसके संचालन एवं वित्तीय आवश्यकताओं की जिम्मेदारी राज्य सरकार की है। इसलिए विश्वविद्यालय की कथित वित्तीय कमियों का भार छात्रों पर डालना उचित नहीं है।
वरिष्ठता सूची को लेकर उठाए सवाल
SFI ने विश्वविद्यालय की वरिष्ठता सूची में कथित विसंगतियों का मुद्दा भी उठाया है। संगठन के मुताबिक, कुलसचिव द्वारा 7 जुलाई 2021 को जारी सूची में PG Centre के 31 Associate Professors में डॉ. राजिंदर वर्मा का नाम चौथे स्थान पर था और उनकी Associate Professor के रूप में जॉइनिंग 13 जून 2017 दर्ज थी।
SFI का दावा है कि 15 नवंबर 2025 की सूची में उन्हें 8 अक्टूबर 2015 से Professor के रूप में पदोन्नत दिखाते हुए वरिष्ठता सूची में 36वें स्थान पर रखा गया। संगठन ने सवाल उठाया है कि यदि Associate Professor के रूप में जॉइनिंग वर्ष 2017 दर्ज थी, तो Professor के रूप में वर्ष 2015 से वरिष्ठता निर्धारित करने का आधार क्या था और इसके लिए किस UGC नियम अथवा कानूनी प्रावधान का इस्तेमाल किया गया।
नियम-विरुद्ध पदोन्नति का आर्थिक बोझ छात्रों पर क्यों?
SFI ने आरोप लगाया कि यदि किसी शिक्षक को नियमों के विपरीत पदोन्नति, वेतन, एरियर या अन्य वित्तीय लाभ दिए गए हैं, तो इससे विश्वविद्यालय के बजट पर अतिरिक्त आर्थिक भार पड़ सकता है। संगठन का कहना है कि ऐसी कथित अनियमितताओं की भरपाई के लिए छात्रों की फीस बढ़ाना अन्यायपूर्ण होगा।
SFI ने मांग की है कि विश्वविद्यालय में CAS Promotions, वरिष्ठता निर्धारण और नियुक्तियों से जुड़े मामलों की स्वतंत्र जांच कराई जाए तथा यदि किसी मामले में नियमों का उल्लंघन पाया जाता है तो जिम्मेदारी तय करते हुए गलत तरीके से दिए गए वित्तीय लाभों की वसूली की जाए।
प्रशासनिक पदों और PVC सुविधाओं पर भी सवाल
SFI ने गलत वरिष्ठता के आधार पर दिए गए कथित प्रशासनिक पदों, जैसे Dean और Head, तथा उस अवधि में लिए गए प्रशासनिक एवं नीतिगत निर्णयों की वैधानिकता की समीक्षा की मांग की है।
संगठन ने यह भी सवाल उठाया है कि Pro-Vice-Chancellor (PVC) के कार्यकाल की समाप्ति के बाद संबंधित व्यक्ति यदि विश्वविद्यालय के कार्यालय, वाहन, स्टाफ या अन्य संसाधनों का इस्तेमाल कर रहा है, तो उसका वैधानिक आधार क्या है। SFI ने प्रशासन से संबंधित आदेश और खर्च का विवरण सार्वजनिक करने की मांग की है।
कुलपति से दस्तावेज सार्वजनिक करने की मांग
SFI ने कुलपति प्रो. महावीर सिंह की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं। संगठन का कहना है कि गंभीर आरोपों और ज्ञापन दिए जाने के बावजूद प्रशासन की ओर से पर्याप्त जवाब नहीं मिला है।
SFI ने कहा कि यदि सभी पदोन्नतियां, वरिष्ठता निर्धारण और वित्तीय निर्णय नियमों के अनुसार हुए हैं, तो विश्वविद्यालय प्रशासन को संबंधित दस्तावेज सार्वजनिक कर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। वहीं, यदि जांच में अनियमितताएं सामने आती हैं तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।
SFI की प्रमुख मांगें
CAS Promotions, वरिष्ठता निर्धारण और कथित अनियमित नियुक्तियों की स्वतंत्र न्यायिक जांच कराई जाए।
नियमों के विपरीत दिए गए वित्तीय लाभों की जांच कर आवश्यक होने पर उनकी वसूली की जाए।
कार्यकाल समाप्त होने के बाद PVC को दी जा रही कथित सुविधाओं का वैधानिक आधार और खर्च सार्वजनिक किया जाए।
छात्रों पर थोपी गई फीस बढ़ोतरी का फैसला तत्काल वापस लिया जाए।
विश्वविद्यालय में वित्तीय एवं प्रशासनिक निर्णयों में पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए।
SFI नेताओं ने कहा कि उनका आंदोलन किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं बल्कि विश्वविद्यालय में पारदर्शिता, जवाबदेही, नियम-कानून के पालन और छात्रों को सस्ती एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने के अधिकार के लिए है।
संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि विश्वविद्यालय प्रशासन फीस बढ़ोतरी वापस नहीं लेता और कथित अनियमितताओं की जांच के लिए कदम नहीं उठाता, तो छात्र संगठन विश्वविद्यालय स्तर पर आंदोलन तेज करेगा। SFI हिमाचल प्रदेश सरकार से भी फीस बढ़ोतरी का फैसला वापस लेने की मांग करते हुए विधानसभा की ओर मार्च करने की चेतावनी दी है।
एसएफआई हिमाचल प्रदेश राज्य कमेटी
अनिल ठाकुर, राज्य अध्यक्ष
सनी सेक्टा, राज्य सचिव
नोट: उपरोक्त खबर में वित्तीय अनियमितताओं, नियम-विरुद्ध पदोन्नति और अन्य आरोप SFI द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति में लगाए गए दावों के रूप में प्रस्तुत किए गए हैं। संबंधित विश्वविद्यालय प्रशासन या अन्य पक्ष की प्रतिक्रिया उपलब्ध होने पर उसे भी खबर में शामिल किया जाना चाहिए।
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