मूसलाधार बारिश से चीका मंडी में धान की फसल को भारी नुकसान, पानी की निकासी के प्रबंध नहीं होने से किसानों की बढ़ी परेशानी
धान की फसल तैयार करने से लेकर उसे मंडी तक पहुंचाने में किसानों को काफी मेहनत और खर्च करना पड़ता है। ऐसे में मंडी में पहुंचने के बाद मूसलाधार बारिश के कारण फसल का भीगना किसानों की चिंता बढ़ा रहा है। बारिश के पानी में भीगने से धान की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है, जिसका असर फसल की बिक्री और किसानों को मिलने वाले दाम पर पड़ने की आशंका है। मंडी में जलभराव होने से धान को बारिश से बचाकर रखना भी मुश्किल हो जाता है।
किसानों का कहना है कि धान के सीजन में मंडियों में पर्याप्त व्यवस्थाएं होना बेहद जरूरी है। बारिश के मौसम को देखते हुए पानी की निकासी के पुख्ता प्रबंध किए जाने चाहिए, ताकि किसानों को अपनी फसल बचाने के लिए परेशान न होना पड़े। किसानों के अनुसार, यदि समय रहते निकासी व्यवस्था को दुरुस्त किया जाए तो जलभराव की समस्या से काफी हद तक बचा जा सकता है और फसल को खराब होने से बचाने में मदद मिल सकती है।
किसानों ने संबंधित अधिकारियों और मंडी प्रशासन से मांग की है कि चीका अनाज मंडी में जलभराव की समस्या का जल्द समाधान किया जाए। मंडी में जमा बारिश के पानी की निकासी करवाने के साथ-साथ भविष्य के लिए भी स्थायी व्यवस्था की जाए, ताकि मूसलाधार बारिश के दौरान किसानों को इस तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े। किसानों का कहना है कि मंडी में उनकी फसल की सुरक्षा और उचित व्यवस्थाएं सुनिश्चित करना जरूरी है, ताकि उन्हें पहले से ही बढ़ती लागत और खेती से जुड़ी चुनौतियों के बीच अतिरिक्त आर्थिक नुकसान न उठाना पड़े।


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