सिमरन, नई दिल्ली, 2025: देश की राजधानी में पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास के उद्देश्यों को लेकर एक ऐतिहासिक पहल की गई। शुक्रवार को एनडीएमसी सभागार, नई दिल्ली में *नेट ज़ीरो होराइजन* की अगुवाई में *इंडिया क्लाइमेट कॉनक्लेव 2025* का आयोजन किया गया। इस महत्वपूर्ण आयोजन ने न केवल पर्यावरणविदों और नीति-निर्माताओं को एक मंच पर लाया, बल्कि स्कूली छात्रों और समाज के अन्य वर्गों की भागीदारी के माध्यम से जन-जागरूकता को भी नई ऊंचाई दी।
कार्यक्रम का उद्घाटन प्रतिष्ठित हस्तियों ने किया — *राज्यसभा सांसद धर्मशीला गुप्ता*, *राज्यसभा सांसद कल्पना सैनी*, *विश्व हिंदी परिषद के राष्ट्रीय महासचिव डॉ. बिपिन कुमार*, *इंडिया फाउंडेशन के निदेशक आलोक बंसल* और इस आयोजन के मुख्य संयोजक * राहुल देव*।
इन सभी महानुभावों ने अपने विचार साझा करते हुए यह स्पष्ट किया कि यदि भारत को कार्बन उत्सर्जन को "नेट ज़ीरो" स्तर तक लाना है, तो यह केवल सरकारी नीतियों के माध्यम से संभव नहीं होगा। इसके लिए *हर नागरिक की भागीदारी*, *प्राकृतिक संसाधनों के प्रति संवेदनशीलता*, और *प्राचीन भारतीय जीवनशैली* को पुनः अपनाना अनिवार्य होगा।
कार्यक्रम की एक उल्लेखनीय विशेषता यह रही कि इसमें दिल्ली-एनसीआर के विभिन्न स्कूलों के छात्रों ने भी भाग लिया। उन्होंने अपने विचार, पोस्टर प्रजेंटेशन और छोटे नाटकों के माध्यम से जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और समाधान को रेखांकित किया। यह सहभागिता आने वाली पीढ़ियों को जागरूक करने का स्पष्ट संकेत था।
आज जब पूरी दुनिया जलवायु आपातकाल का सामना कर रही है, भारत अपने सांस्कृतिक मूल्यों और नवाचारों के साथ एक बार फिर विश्व का नेतृत्व कर सकता है।
यह आयोजन इसी दिशा में एक सशक्त प्रयास था।
यही संदेश लेकर यह कॉनक्लेव संपन्न हुआ, और देश को एक नई दिशा देने का कार्य किया।
इस कॉनक्लेव के विभिन्न तकनीकी सत्रों में *IIT के प्रोफेसर*, *पर्यावरणविद*, *ग्रीन स्टार्टअप्स*, *मीडिया जगत के प्रतिनिधियों* और *युवा छात्रों* ने हिस्सा लिया।
कार्यक्रम की विशेषता यह रही कि सभी वक्ताओं ने एकमत होकर यह स्वीकार किया कि भारत की *प्राचीन जीवनशैली*, जिसमें *स्थिरता*, *प्राकृतिक संसाधनों का सीमित उपयोग* और *प्रकृति के साथ सामंजस्य* प्रमुख तत्व रहे हैं, आज के समय में पर्यावरण संकट से निपटने का सर्वश्रेष्ठ मार्ग है ।
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