शिमला -हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस के भीतर चल रहा अंदरूनी विवाद अब खुलकर सामने आ गया है। कांग्रेस उपाध्यक्ष एवं पूर्व विधायक नीरज भारती ने अपने पद से इस्तीफा देने के बाद पार्टी और सरकार के खिलाफ तीखा मोर्चा खोल दिया है। खास बात यह है कि जिस सरकार पर उन्होंने गंभीर आरोप लगाए हैं, उसमें उनके पिता चंद्र कुमार कृषि मंत्री हैं, जिससे मामला और अधिक संवेदनशील बन गया है।
सियासी गलियारों में उनके भारतीय जनता पार्टी में जाने की अटकलें तेज हो गई थीं, हालांकि नीरज भारती ने स्पष्ट कर दिया है कि वह न तो भाजपा में शामिल होंगे और न ही किसी अन्य दल का हिस्सा बनेंगे। इस बीच प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष विनय कुमार ने उनका इस्तीफा स्वीकार कर लिया है, जबकि मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने इस मामले को “कोई बड़ा मुद्दा नहीं” बताया है।
नीरज भारती ने इस्तीफे के बाद सोशल मीडिया पर एक के बाद एक 15 से अधिक पोस्ट कर राजनीतिक हलचल बढ़ा दी। इन पोस्टों में उन्होंने कांग्रेस सरकार और संगठन पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि हर महीने “नोटों के पांच ब्रीफकेस” इकट्ठे किए जाते हैं, जिनमें से कुछ दिल्ली भेजे जाते हैं और कुछ रख लिए जाते हैं, हालांकि उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि यह व्यवस्था किसके द्वारा संचालित है।
उन्होंने नेतृत्व पर सवाल उठाते हुए यह भी कहा कि जिन नेताओं ने भाजपा सरकार के दौरान कांग्रेस के लिए संघर्ष किया, उन्हें उचित पद नहीं मिले, जबकि अपेक्षाकृत कम सक्रिय नेताओं को महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दे दी गईं। उनकी एक पोस्ट, जिसमें लिखा था कि “अगर हिमाचल में कांग्रेस का बेड़ागर्क किसी ने किया है तो वो दो सुख हैं”, सबसे अधिक चर्चा में रही और इसे मुख्यमंत्री सुक्खू और संगठन के एक अन्य नेता पर सीधा हमला माना जा रहा है।
नीरज भारती ने अपने इस्तीफे में कहा कि कांग्रेस के हजारों जमीनी कार्यकर्ता, जिन्होंने संघर्ष कर पार्टी को सत्ता में लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, आज उपेक्षित महसूस कर रहे हैं। उन्होंने संगठन और सरकार के बीच बढ़ती दूरी को गंभीर चिंता का विषय बताया और कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में वे अपने दायित्वों के साथ सामंजस्य नहीं बैठा पा रहे हैं।
इसी बीच पार्टी ने कार्रवाई करते हुए नीरज भारती को 6 साल के लिए कांग्रेस से निष्कासित कर दिया है। बताया जा रहा है कि उन्होंने इस्तीफा पहले ही तत्काल प्रभाव से भेज दिया था, जिसे बाद में स्वीकार कर लिया गया।
फिलहाल, इस पूरे राजनीतिक घटनाक्रम पर सरकार या शीर्ष नेतृत्व की ओर से विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, जिससे हिमाचल की राजनीति में तनाव और सस्पेंस दोनों बढ़ गए हैं।

Comments
Post a Comment