पंजाब में पराली जलाने के 1,007 मामले दर्ज, तरनतारन जिला सबसे आगे; 54.50 फीसदी धान क्षेत्र में हुई कटाई

चंडीगढ़, 30 अक्टूबर। पंजाब में धान की कटाई के सीजन के दौरान पराली जलाने की घटनाओं पर निगरानी और कार्रवाई लगातार जारी है। राज्य सरकार की 29 अक्टूबर 2026 तक की रिपोर्ट के अनुसार, प्रदेश में पराली जलाने की कुल 1,007 घटनाएं दर्ज की गई हैं। वहीं, धान के कुल रकबे में से 54.50 प्रतिशत क्षेत्र में कटाई का काम पूरा हो चुका है।


रिपोर्ट के मुताबिक, राज्यभर में पराली जलाने की घटनाओं को लेकर 778 खेतों का निरीक्षण किया गया, जबकि 739 स्थानों पर मौके पर जाकर फिजिकल वेरिफिकेशन किया गया। इसके अलावा, संबंधित मामलों में चालान और अन्य कानूनी कार्रवाई भी की गई है।

तरनतारन में सबसे अधिक पराली जलाने की घटनाएं

जिला स्तर पर जारी आंकड़ों के अनुसार, तरनतारन जिले में सबसे अधिक 397 पराली जलाने की घटनाएं सामने आई हैं। इसके बाद बठिंडा में 71, अमृतसर में 171, बरनाला में 7, फाजिल्का में 28 और गुरदासपुर में 72 मामले दर्ज किए गए हैं।

रिपोर्ट में विभिन्न जिलों में पराली जलाने की घटनाओं की निगरानी, खेतों के निरीक्षण और पर्यावरण मुआवजे की वसूली का विवरण भी शामिल है।

पर्यावरण मुआवजे को लेकर भी कार्रवाई

प्रशासन की ओर से पराली जलाने के मामलों में पर्यावरण मुआवजा लगाने और उसकी वसूली की प्रक्रिया भी जारी है। सरकारी रिपोर्ट में पर्यावरण मुआवजे के रूप में कुल 17.25 लाख रुपये लगाए जाने और 13.15 लाख रुपये की वसूली का उल्लेख किया गया है।

इसके साथ ही संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय करने के लिए चेतावनी और कारण बताओ नोटिस जारी करने की कार्रवाई भी की जा रही है।

प्रशासन की निगरानी जारी

धान कटाई के सीजन में पराली जलाने की घटनाओं को रोकने के लिए जिला प्रशासन, कृषि विभाग और संबंधित अधिकारियों की ओर से निगरानी की जा रही है। आने वाले दिनों में धान की कटाई बढ़ने के साथ पराली प्रबंधन और खेतों में आग लगाने की घटनाओं पर नियंत्रण प्रशासन के लिए अहम चुनौती बना रहेगा।

नोट: खबर पंजाब सरकार की 29 अक्टूबर 2026 तक की उपलब्ध करवाई गई रिपोर्ट पर आधारित है।

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