हरियाणा में आज रात 10 बजे से बिजली कर्मचारियों की हड़ताल, 24 अक्टूबर तक सेवाओं पर असर की आशंका
निजी कंपनी को समानांतर बिजली वितरण लाइसेंस देने के विरोध में भिवानी में प्रदर्शन, कर्मचारियों ने फूंकी फैसले की प्रतियां; मांगें नहीं मानीं तो अनिश्चितकालीन हड़ताल की चेतावनी
भिवानी। हरियाणा में बिजली कर्मचारियों की प्रस्तावित प्रदेशव्यापी हड़ताल से बिजली सेवाओं पर असर पड़ने की आशंका है। गुरुग्राम और नूंह में निजी कंपनी को बिजली वितरण का समानांतर लाइसेंस देने के विरोध में बिजली कर्मचारियों और इंजीनियरों के संयुक्त संघर्ष मोर्चा ने 22 से 24 अक्टूबर तक हड़ताल का ऐलान किया है। हड़ताल आज रात 10 बजे से शुरू होनी है। इसी कड़ी में भिवानी में बिजली कर्मचारियों ने सरकार के फैसले के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया और विरोध स्वरूप प्रतियां फूंकीं।
कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने समानांतर लाइसेंस देने का फैसला वापस नहीं लिया, तो 25 अक्टूबर को होने वाली बैठक में आंदोलन को अनिश्चितकालीन करने पर फैसला लिया जा सकता है। ऐसे में त्योहारों के बीच बिजली उपभोक्ताओं की मुश्किलें बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
निजी कंपनी को लाइसेंस देने के फैसले पर विरोध
बिजली कर्मचारियों का विरोध गुरुग्राम और नूंह में बिजली वितरण के लिए निजी कंपनी इलेवन पावर प्राइवेट लिमिटेड को समानांतर लाइसेंस देने के फैसले को लेकर है। कर्मचारियों का कहना है कि इस कदम से बिजली विभाग के निजीकरण को बढ़ावा मिल सकता है और भविष्य में उपभोक्ताओं पर बिजली की दरें बढ़ने का दबाव पड़ सकता है।
कर्मचारी संगठनों का आरोप है कि सरकार के साथ पहले भी कई दौर की बातचीत हो चुकी है, लेकिन उनकी आपत्तियों का समाधान नहीं निकाला गया। इसी के विरोध में संयुक्त संघर्ष मोर्चा ने प्रदेशव्यापी हड़ताल का निर्णय लिया है।
भिवानी में प्रदर्शन के दौरान कर्मचारियों ने सरकार से अपना फैसला वापस लेने की मांग की। उन्होंने कहा कि बिजली विभाग को कर्मचारियों ने वर्षों की मेहनत और योगदान से मजबूत बनाया है। ऐसे में वितरण व्यवस्था में निजी कंपनी को समानांतर लाइसेंस देना उनके हितों के खिलाफ है।
धर्मवीर भाटी बोले- सरकार ने मांगों पर नहीं की ठोस कार्रवाई
प्रदर्शन के दौरान धर्मवीर भाटी ने कहा कि कर्मचारियों ने सरकार को बातचीत और मांगों पर विचार करने के लिए पर्याप्त समय दिया था, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।
उन्होंने आरोप लगाया कि समानांतर लाइसेंस देने का फैसला बिजली विभाग और कर्मचारियों के हितों के विपरीत है। भाटी ने आम जनता से भी इस मुद्दे पर कर्मचारियों का समर्थन करने की अपील की।
सूरजभान ने कहा- मांगें नहीं मानीं तो तेज होगा आंदोलन
हरियाणा कर्मचारी महासंघ के राज्य प्रधान सूरजभान ने कहा कि सरकार कर्मचारियों की मांगों पर सहमति तो जताती है, लेकिन उन्हें लागू करने में देरी होती है। उन्होंने बताया कि संयुक्त संघर्ष मोर्चा में बिजली कर्मचारी, इंजीनियर और विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हैं।
उन्होंने दीपावली के त्योहार का हवाला देते हुए सरकार से समय रहते विवाद का समाधान निकालने की अपील की। सूरजभान के मुताबिक, यदि कर्मचारियों की मांगों पर सहमति नहीं बनती है, तो आंदोलन को आगे बढ़ाने का फैसला लिया जा सकता है। इससे आम जनता को भी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
मनोज बल्लू बामला ने दी अनिश्चितकालीन हड़ताल की चेतावनी
मनोज बल्लू बामला ने कहा कि बिजली विभाग कर्मचारियों की मेहनत और वर्षों के योगदान से खड़ा हुआ है। उन्होंने निजी कंपनी को समानांतर लाइसेंस देने का फैसला वापस लेने की मांग की।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि 22 अक्टूबर की रात 10 बजे तक समाधान नहीं निकला, तो कर्मचारी घोषित कार्यक्रम के अनुसार हड़ताल पर चले जाएंगे। उन्होंने बताया कि 25 अक्टूबर को केंद्रीय नेतृत्व की बैठक में आंदोलन की आगे की रणनीति तय की जाएगी। मांगें नहीं माने जाने की स्थिति में अनिश्चितकालीन हड़ताल का विकल्प भी खुला रखा गया है।
बिजली मंत्री अनिल विज की बैठक में शामिल नहीं होगा संयुक्त संघर्ष मोर्चा
इस विवाद के बीच बिजली मंत्री अनिल विज की ओर से कर्मचारी प्रतिनिधियों को बातचीत के लिए बुलाया गया था। हालांकि, संयुक्त संघर्ष मोर्चा ने बैठक में शामिल होने में असमर्थता जताई है। इससे सरकार और कर्मचारी संगठनों के बीच तत्काल सहमति बनने की संभावना पर सवाल खड़े हो गए हैं।
कर्मचारी संगठनों का कहना है कि उनकी मुख्य मांग निजी कंपनी को समानांतर बिजली वितरण लाइसेंस देने का फैसला वापस लेना है। उनका दावा है कि हड़ताल में बिजली विभाग की विभिन्न यूनियनों और इंजीनियरिंग संगठनों के सदस्य शामिल होंगे।
25 अक्टूबर को तय होगी आंदोलन की अगली रणनीति
फिलहाल संयुक्त संघर्ष मोर्चा ने 22 से 24 अक्टूबर तक प्रदेशव्यापी हड़ताल का ऐलान किया है। यदि इस दौरान सरकार और कर्मचारी संगठनों के बीच सहमति नहीं बनती है, तो आंदोलन को आगे बढ़ाया जा सकता है।
हड़ताल के दौरान बिजली सेवाओं पर कितना असर पड़ेगा, यह कर्मचारियों की भागीदारी और वैकल्पिक व्यवस्थाओं पर निर्भर करेगा। ऐसे में उपभोक्ताओं की नजर सरकार के अगले कदम और कर्मचारी संगठनों के साथ संभावित बातचीत पर रहेगी।
अब बड़ा सवाल यह है कि क्या हरियाणा सरकार और बिजली कर्मचारी संगठनों के बीच टकराव का समाधान निकल पाएगा, या दीपावली से पहले प्रदेश में बिजली संकट की आशंका और गहरा जाएगी?

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