कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण इस वर्ष की थीम ‘#नशा क्विट–लाइफ हिट’ पर आधारित टी-शर्ट का अनावरण रहा। इस थीम का उद्देश्य बच्चों, शिक्षकों, अभिभावकों और समाज को नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करना तथा स्वस्थ, सुरक्षित और नशामुक्त जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करना है। सभी बच्चों की समावेशी भागीदारी को बढ़ावा देने के उद्देश्य से विभिन्न स्कूल क्लस्टरों के विशेष आवश्यकता वाले बच्चों द्वारा तैयार कलाकृतियों की प्रदर्शनी भी लगाई गई।
चंडीगढ़ न्यायिक अकादमी की निदेशक प्रशासन सुश्री हरलीन ए. शर्मा ने विशेष अतिथि के रूप में कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई। चंडीगढ़ प्रशासन के समाज कल्याण एवं महिला और बाल विकास निदेशक श्री नवीन रत्तू, दानिक्स, सम्मानित अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। कार्यक्रम में सहायक श्रम आयुक्त श्री आकाश मित्तल, शिक्षा विभाग की उपनिदेशक सुश्री निर्मल शर्मा तथा जिला शिक्षा अधिकारी, यू.टी. चंडीगढ़, श्री संजीव कुमार सिंगला भी उपस्थित थे।
कार्यक्रम में चंडीगढ़ के सरकारी, निजी और सहायता प्राप्त विद्यालयों के प्रधानाचार्यों, उपप्रधानाचार्यों, क्लस्टर प्रमुखों और क्लस्टर संसाधन समन्वयकों के साथ एनएसएस विद्यार्थियों तथा बाल देखभाल संस्थानों के बच्चों ने भाग लिया। बाल कल्याण समिति, केंद्रशासित प्रदेश बाल संरक्षण सोसायटी, जिला बाल संरक्षण इकाई के प्रतिनिधि तथा बाल देखभाल संस्थानों के रेजिडेंट मैनेजर भी इसमें शामिल हुए। विद्यार्थियों ने सांस्कृतिक कार्यक्रमों और लोक प्रस्तुतियों से सभी का मन मोह लिया। पंजाब मार्शल आर्ट्स द्वारा गतका की प्रस्तुति भी दी गई।
अपने स्वागत संबोधन में आयोग की अध्यक्ष सुश्री शिप्रा बंसल ने गणमान्य अतिथियों, शिक्षकों, बाल संरक्षण से जुड़े पदाधिकारियों और बच्चों का अभिनंदन किया। उन्होंने बच्चों के अधिकारों की रक्षा तथा उनके समग्र विकास और कल्याण से जुड़ी पहलों को निरंतर मार्गदर्शन एवं प्रोत्साहन देने के लिए पंजाब के माननीय राज्यपाल एवं केंद्रशासित प्रदेश चंडीगढ़ के प्रशासक श्री गुलाब चंद कटारिया का आभार व्यक्त किया।
सुश्री बंसल ने महोत्सव के आयोजन में चंडीगढ़ प्रशासन, विशेष रूप से शिक्षा विभाग और समाज कल्याण विभाग के सहयोग की सराहना की। उन्होंने कहा कि चंडीगढ़ को बाल हितैषी शहर बनाने की दिशा में सभी संबंधित पक्षों के सामूहिक प्रयास महत्वपूर्ण हैं।
इस वर्ष की थीम पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि बच्चों को कम उम्र से ही स्वस्थ विकल्प चुनने, चुनौतियों का सामना करने की क्षमता विकसित करने, नशे से जुड़े जोखिमों को पहचानने तथा आवश्यकता पड़ने पर उचित मार्गदर्शन और सहायता लेने के लिए सशक्त बनाना आवश्यक है। उन्होंने बताया कि एसबीएम–4.0 का उद्देश्य बच्चों में नैतिक मूल्यों, शिष्टाचार और सम्मानपूर्ण व्यवहार को बढ़ावा देना भी है, ताकि वे गरिमापूर्ण जीवन जी सकें।
महीने भर चलने वाले इस महोत्सव के अंतर्गत श्लोक पाठ, भाषण, ‘दिखाओ और बताओ’, नाट्य प्रस्तुति, कहानी सुनाने, चित्रकला और पोस्टर निर्माण सहित विभिन्न शैक्षिक गतिविधियां एवं प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएंगी। ये गतिविधियां सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) से जुड़े विभिन्न बाल-केंद्रित विषयों पर आधारित होंगी और बच्चों को रचनात्मकता, संवाद तथा सहभागिता के माध्यम से सीखने के अवसर प्रदान करेंगी।
इस अवसर पर श्री नवीन रत्तू ने आयोग की पहल की सराहना करते हुए कहा कि प्रत्येक बच्चे की सुरक्षा, गरिमा और समग्र विकास सुनिश्चित करने के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी हैं। उन्होंने कहा कि ‘#नशा क्विट–लाइफ हिट’ थीम वर्तमान संदर्भ में विशेष रूप से प्रासंगिक है, क्योंकि बच्चों और किशोरों को सही निर्णय लेने के लिए समय पर मार्गदर्शन, जागरूकता और सहयोगपूर्ण वातावरण की आवश्यकता होती है। उन्होंने विद्यालयों, शिक्षकों, अभिभावकों, सामुदायिक प्रतिनिधियों तथा बाल संरक्षण से जुड़े सभी पक्षों से मिलकर बच्चों में स्वस्थ आदतें विकसित करने, खुले संवाद को प्रोत्साहित करने और उन्हें उद्देश्यपूर्ण एवं नशामुक्त जीवन जीने के लिए प्रेरित करने का आह्वान किया।
अपने अध्यक्षीय संबोधन में सुश्री हरलीन ए. शर्मा ने सशक्त बाल महोत्सव के चौथे संस्करण के आयोजन के लिए आयोग के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने महोत्सव की भावना और संविधान तथा किशोर न्याय अधिनियम एवं पॉक्सो अधिनियम सहित बाल संरक्षण कानूनों में निहित सिद्धांतों के बीच संबंध पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि बाल अधिकारों की रक्षा में बच्चों की सुरक्षा के साथ उनका सशक्तीकरण, सहभागिता और सकारात्मक विकास भी शामिल है। उन्होंने कहा कि सशक्त बचपन एक न्यायपूर्ण समाज की नींव है और सशक्त बाल महोत्सव जैसी पहल इन सिद्धांतों को व्यवहार में उतारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

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