**निदेशक प्रो. विवेक लाल ने व्यक्तिगत रूप से बच्ची के स्वास्थ्य की निगरानी की; विभिन्न विशेषज्ञताओं की टीम ने समन्वित प्रयासों से सुनिश्चित की व्यापक चिकित्सा देखभाल और स्वस्थ होने की प्रक्रिया।**
एक सुखद घटनाक्रम में, 28 अक्टूबर को पंचकूला में हुई दुर्भाग्यपूर्ण स्कूल घटना के बाद पोस्टग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च (PGIMER), चंडीगढ़ में भर्ती कराई गई छह वर्षीय बच्ची को व्यापक चिकित्सा देखभाल प्रदान करने के बाद अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है।
बच्ची के उपचार के दौरान अत्यंत संवेदनशीलता, सावधानी और मानवीय दृष्टिकोण अपनाया गया। संस्थान द्वारा उपचार का पूरा खर्च वहन किया गया, जिसमें चिकित्सा संबंधी सभी खर्चों के साथ निजी कमरे की सुविधा का खर्च भी शामिल था। इस प्रकार, इस कठिन समय में परिवार पर किसी भी प्रकार का आर्थिक बोझ नहीं पड़ने दिया गया।
PGIMER के निदेशक **प्रो. विवेक लाल**, जिन्होंने अस्पताल में भर्ती रहने के दौरान व्यक्तिगत रूप से बच्ची से मुलाकात कर उसके स्वास्थ्य एवं कुशलक्षेम की जानकारी ली थी, ने बच्ची को स्वस्थ होने के बाद अस्पताल से छुट्टी मिलने पर संतोष व्यक्त करते हुए कहा,
“नन्ही बच्ची को सुरक्षित रूप से अस्पताल से छुट्टी मिलना PGIMER परिवार के हम सभी सदस्यों के लिए अत्यंत राहत और प्रसन्नता का क्षण है। इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना ने हम सभी को गहराई से प्रभावित किया था और शुरुआत से ही हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना रही कि बच्ची को देखभाल, संवेदनशीलता और भरोसे के वातावरण में सर्वोत्तम संभव चिकित्सा सुविधा मिले। मैं अपने चिकित्सकों, नर्सिंग पेशेवरों और सहयोगी कर्मचारियों का विशेष रूप से आभारी हूं, जिन्होंने बच्ची के स्वास्थ्य लाभ के लिए पूरी निष्ठा, समर्पण और संवेदनशीलता के साथ कार्य किया।”
निदेशक PGIMER ने आगे कहा,
“PGIMER में हमारा दृढ़ विश्वास है कि गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच कभी भी किसी व्यक्ति की आर्थिक परिस्थितियों से प्रभावित नहीं होनी चाहिए। संस्थान इस कठिन समय में बच्ची और उसके परिवार को हरसंभव सहयोग देने के लिए प्रतिबद्ध था। हम बच्ची के स्वस्थ, सुखद और उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हैं।”
बच्ची की चिकित्सा देखभाल **प्रो. जे.के. महाजन**, विभागाध्यक्ष, पीडियाट्रिक सर्जरी विभाग, PGIMER के मार्गदर्शन में विभिन्न टीमों के समन्वित प्रयासों से की गई। इस दौरान ट्रॉमा सेंटर ने उसकी देखभाल को सुचारू बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। **डॉ. रमन शर्मा**, प्रभारी, ट्रॉमा सेंटर ने उपचार के ट्रॉमा संबंधी पहलुओं का समन्वय किया, जबकि **प्रो. अशोक कुमार**, चिकित्सा अधीक्षक ने बच्ची के उपचार एवं अस्पताल में भर्ती रहने के दौरान आवश्यक संस्थागत सहयोग और समन्वय सुनिश्चित किया।
इस अवसर पर अपने विचार साझा करते हुए **प्रो. जे.के. महाजन**, विभागाध्यक्ष, पीडियाट्रिक सर्जरी विभाग, PGIMER ने कहा,
“इस तरह की दुर्भाग्यपूर्ण घटना के बाद किसी छोटे बच्चे का उपचार करना केवल चिकित्सकीय विशेषज्ञता ही नहीं, बल्कि संवेदनशीलता, धैर्य और करुणापूर्ण दृष्टिकोण की भी मांग करता है। हमारी टीम पूरे अस्पताल प्रवास के दौरान आवश्यक चिकित्सा देखभाल प्रदान करने और बच्ची के स्वास्थ्य एवं कल्याण को सुनिश्चित करने के लिए निरंतर प्रयासरत रही। हमें प्रसन्नता है कि अब उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है। हम पूरी आशा करते हैं कि वह शीघ्र ही सामान्य जीवन में लौट आएगी। PGIMER की विभिन्न टीमों के समन्वित प्रयासों ने यह सुनिश्चित किया कि उसकी देखभाल हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता बनी रहे।”
बच्ची को अस्पताल से छुट्टी मिलना एक दुर्भाग्यपूर्ण घटनाक्रम के बाद राहत और आश्वस्ति का संदेश है, जिसने उसके परिवार के साथ-साथ व्यापक समुदाय में भी चिंता और व्याकुलता पैदा कर दी थी। PGIMER की यह पहल संस्थान के चिरस्थायी मूल्यों **'उत्कृष्टता, संवेदनशीलता और समानता' (Excellence, Empathy and Equity)** को प्रतिबिंबित करती है। यह इस प्रतिबद्धता को भी पुनः पुष्ट करती है कि संस्थान की स्वास्थ्य सेवाओं के केंद्र में सदैव मरीज रहेंगे, विशेषकर बच्चे और समाज के कमजोर एवं जरूरतमंद वर्ग।
संस्थान नन्ही बच्ची के शीघ्र सामान्य जीवन में लौटने, उत्तम स्वास्थ्य और उज्ज्वल भविष्य की कामना करता है।
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