वर्ष 2026-27 के सीजन में किसानों ने 201 करोड़ रुपये की सब्सिडी का लाभ उठाकर खरीदीं 22 हजार से अधिक सीआरएम मशीनें; पिछले वर्ष की तुलना में मशीनों की खरीद में 73 प्रतिशत वृद्धि दर्ज: खुड्डियां
मान सरकार ने 1,325 करोड़ रुपये खर्च कर किसानों को उपलब्ध करवाईं 94,456 फसल अवशेष प्रबंधन मशीनें: गुरमीत सिंह खुड्डियां
चंडीगढ़,:पराली प्रबंधन की दिशा में किए जा रहे प्रयासों के तहत मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार ने अपने कार्यकाल के दौरान 1,325.35 करोड़ रुपये का बड़ा निवेश किया है। इसके परिणामस्वरूप अब राज्य में 94,456 फसल अवशेष प्रबंधन (सीआरएम) मशीनें उपलब्ध हैं और पराली जलाने की घटनाओं में 90 प्रतिशत की कमी आई है। वर्ष 2022 में पराली जलाने के 49,922 मामले सामने आए थे, जो वर्ष 2025 में घटकर मात्र 5,114 रह गए।
पिछले लगभग साढ़े चार वर्षों के आंकड़े जारी करते हुए पंजाब के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री स. गुरमीत सिंह खुड्डियां ने बताया कि सरकार इस अभियान में कोई ढिलाई नहीं बरत रही है। वर्ष 2026-27 के सीजन के लिए किसानों ने लगभग 201 करोड़ रुपये की सब्सिडी का लाभ उठाते हुए 22,763 सीआरएम मशीनें खरीद ली हैं। इससे पंजाब पराली जलाने की समस्या से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है। यह पिछले वर्ष किसानों को उपलब्ध करवाई गईं 13,147 मशीनों की तुलना में 67 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि दर्शाता है।
स. खुड्डियां ने कहा, "मुख्यमंत्री मान के दूरदर्शी नेतृत्व में हमने यह सुनिश्चित किया है कि आर्थिक तंगी के कारण कोई भी किसान पर्यावरण के अनुकूल खेती के तरीके अपनाने से वंचित न रहे।"
उन्होंने कहा कि वर्ष 2022-23 से अब तक 1,325 करोड़ रुपये से अधिक खर्च करके 94 हजार से अधिक सीआरएम मशीनें उपलब्ध करवाना पंजाब की मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने और स्वच्छ एवं स्वस्थ पर्यावरण के प्रति सरकार की दृढ़ प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
इस अभियान का वर्षवार विवरण देते हुए कृषि मंत्री ने बताया कि वर्ष 2022-23 के दौरान 27,250 मशीनों के लिए 279.96 करोड़ रुपये, वर्ष 2023-24 में 13,179 मशीनों के लिए 168.88 करोड़ रुपये, वर्ष 2024-25 में 18,117 मशीनों के लिए 259.81 करोड़ रुपये तथा वर्ष 2025-26 के दौरान 13,147 मशीनों के लिए 415.7 करोड़ रुपये की सब्सिडी जारी की गई।
पराली जलाने के खिलाफ पंजाब सरकार की शून्य-सहनशीलता नीति दोहराते हुए कृषि मंत्री ने किसानों से अपील की कि वे पर्यावरण और जनस्वास्थ्य की रक्षा के लिए सब्सिडी पर उपलब्ध करवाई जा रही पराली प्रबंधन मशीनरी का अधिक से अधिक उपयोग करें। उन्होंने कहा कि वर्ष 2026-27 के लिए 22 हजार से अधिक मशीनों की समय पर खरीद से यह सुनिश्चित हुआ है कि पंजाब इस उद्देश्य के लिए पूरी तरह तैयार है। इससे किसानों को पराली जलाए बिना उसका वैज्ञानिक तरीके से प्रबंधन करने में और अधिक सहायता मिलेगी।
सरकार की किसान हितैषी नीति पर जोर देते हुए स. गुरमीत सिंह खुड्डियां ने बताया कि छोटे और मध्यम किसानों को सक्षम बनाने के लिए कस्टम हायरिंग सेंटर (सीएचसी) के लिए निर्धारित कुल धनराशि का 75 प्रतिशत हिस्सा प्राथमिक कृषि सहकारी समितियों (पैक्स) के लिए आरक्षित रखा गया है। इसके अलावा, व्यापक सूचना, शिक्षा एवं संचार (आईईसी) अभियान के तहत बायो-डिकंपोजर के इस्तेमाल को प्रोत्साहित करने के लिए 6 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
स. गुरमीत सिंह खुड्डियां ने कहा कि इस विशेष आवंटन से आर्थिक रूप से कमजोर किसानों के लिए इन-सीटू (खेत में ही) और एक्स-सीटू (खेत से बाहर) पराली प्रबंधन मशीनरी तक पहुंच आसान हुई है। इसके सकारात्मक परिणाम भी स्पष्ट दिखाई दे रहे हैं। इस वर्ष 846 पी ए सी एस को 3,247 मशीनें उपलब्ध करवाई गई हैं, जबकि पिछले वर्ष 300 पैक्स को केवल 1,262 मशीनें दी गई थीं। यह इस दिशा में हुई उल्लेखनीय प्रगति को दर्शाता है।

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