‘वोट चोरी’, चुनावी पारदर्शिता, संवैधानिक जवाबदेही और कानून-व्यवस्था पर हरियाणा के अनुत्तरित सवालों का जवाब दें अमित शाह, फिर करें ‘लोकतंत्र बचाने’ की बात : संजय दत्त एवं राव नरेंद्र सिंह

भाजपा के ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ अभियान से उठता है एक बुनियादी सवाल : चुनावों की निष्पक्षता और संवैधानिक संस्थाओं की जवाबदेही पर सवाल उठाना अराजकता कैसे हो सकता है?

*चंडीगढ़/करनाल/अंबाला, 4 नवंबर, 2026: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह कल हरियाणा आ रहे हैं। वे करनाल में भाजपा की ओर से आयोजित ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ मार्च का नेतृत्व करेंगे और अंबाला में एक जनसभा को संबोधित करेंगे। लेकिन इस राजनीतिक कवायद को शुरू करने से पहले उन्हें हरियाणा की जनता के उन कई बुनियादी सवालों का स्पष्ट और संतोषजनक जवाब देना चाहिए, जो लोकतंत्र, चुनावी निष्पक्षता, संवैधानिक संस्थाओं की स्वतंत्रता और प्रदेश में लगातार बिगड़ती शासन-व्यवस्था से जुड़े हैं।



यह बेहद आश्चर्यजनक है कि जिस पार्टी ने चुनावी पारदर्शिता से जुड़े गंभीर सवालों का आज तक संतोषजनक जवाब नहीं दिया, वही अब लोकतंत्र बचाने के नाम पर अभियान चला रही है। लोकतंत्र केवल नारों, जुलूसों और राजनीतिक आयोजनों से सुरक्षित नहीं होता। लोकतंत्र की रक्षा पारदर्शिता, जवाबदेही, संस्थाओं की स्वतंत्रता और जनता के जनादेश के सम्मान से होती है।


*1. हरियाणा में कथित ‘वोट चोरी’ पर राहुल गांधी जी द्वारा उठाए गए सवालों का जवाब दें अमित शाह*


हरियाणा की जनता वर्ष 2024 के विधानसभा चुनावों को लेकर लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष श्री राहुल गांधी जी द्वारा किए गए विस्तृत खुलासों और उठाए गए गंभीर सवालों को भूली नहीं है।


उन्होंने संदिग्ध मतदाता प्रविष्टियों, एक जैसी और संदिग्ध तस्वीरों, मतदाता रिकॉर्ड में विसंगतियों, मतदाताओं के नाम काटे जाने तथा चुनावी प्रक्रिया में अन्य अनियमितताओं से संबंधित विशिष्ट तथ्य सामने रखे थे। उन्होंने गंभीर सवाल उठाए थे कि किस प्रकार हरियाणा के चुनावी जनादेश को प्रभावित किया गया।


इन सवालों को निराधार या राजनीतिक रूप से प्रेरित बताकर खारिज नहीं किया जा सकता। भाजपा नेतृत्व, चुनाव आयोग और संबंधित अधिकारियों की यह जिम्मेदारी है कि वे जनता को प्रत्येक आरोप का पारदर्शी और बिंदुवार जवाब दें।


हम अमित शाह जी से पूछना चाहते हैं :


- श्री राहुल गांधी जी द्वारा लगाए गए विशिष्ट आरोपों पर भाजपा नेतृत्व ने अब तक कोई ठोस और संतोषजनक जवाब क्यों नहीं दिया है ?

- कथित चुनावी अनियमितताओं की निष्पक्ष, स्वतंत्र और पारदर्शी जांच अब तक क्यों नहीं कराई गई ?

- हरियाणा की जनता को यह जानने का अधिकार क्यों नहीं होना चाहिए कि विधानसभा चुनाव में डाला गया प्रत्येक वोट सही-सही गिना गया और प्रत्येक वास्तविक मतदाता को अपने मताधिकार का प्रयोग करने का अवसर मिला ?


*2. मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति समिति से भारत के मुख्य न्यायाधीश को क्यों बाहर किया गया ?*


अमित शाह जी को वर्ष 2023 में पारित उस कानून के पीछे का तर्क भी स्पष्ट करना चाहिए, जिसके तहत मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति की सिफारिश करने वाली समिति में भारत के मुख्य न्यायाधीश के स्थान पर प्रधानमंत्री द्वारा नामित केंद्रीय मंत्रिमंडल के एक मंत्री को शामिल कर दिया गया।


भारत के सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व निर्धारित ढांचे के तहत नियुक्ति प्रक्रिया का हिस्सा रहे देश के मुख्य न्यायाधीश को इस समिति से बाहर क्यों किया गया ?


उनके स्थान पर केंद्र सरकार के मंत्री को क्यों शामिल किया गया ?


जब चुनावी संस्थाओं के प्रति जनता का विश्वास बनाए रखना बेहद जरूरी है, तब सरकार ने ऐसी नियुक्ति व्यवस्था क्यों चुनी, जिसमें समिति के तीन में से दो सदस्य सत्तारूढ़ सरकार के प्रतिनिधि हैं ?


यह चुनाव आयोग की संस्थागत स्वतंत्रता और उसकी निष्पक्षता में जनता के विश्वास से जुड़ा एक बुनियादी सवाल है।


*3. मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों को कानूनी संरक्षण क्यों दिया गया ?*


वर्ष 2023 के कानून में धारा 16 भी जोड़ी गई, जिसके तहत पद पर रहते हुए या पद छोड़ने के बाद मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों के विरुद्ध उनके आधिकारिक कर्तव्यों के निर्वहन या कथित निर्वहन के दौरान किए गए कार्यों, गतिविधियों अथवा कहे गए शब्दों के संबंध में दीवानी या आपराधिक कार्यवाही शुरू करने या जारी रखने पर रोक लगाई गई है।


सरकार को इतने व्यापक कानूनी संरक्षण की आवश्यकता क्यों महसूस हुई ?


संवैधानिक जिम्मेदारी निभाने वाले पदाधिकारियों को उचित कानूनी जवाबदेही के दायरे में क्यों नहीं होना चाहिए ?


इस प्रावधान के तहत मिलने वाला संरक्षण संबंधित पदाधिकारी के पद छोड़ने के बाद भी उन कार्यों के लिए जारी रहता है, जो इस प्रावधान के दायरे में आते हैं। इस प्रावधान की संवैधानिक वैधता को भी सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी गई है।


अमित शाह जी को स्पष्ट करना चाहिए कि सरकार को इस प्रावधान की आवश्यकता क्यों पड़ी और यह चुनाव आयोग की स्वतंत्रता तथा जवाबदेही में जनता का विश्वास मजबूत करने के बजाय उसे कमजोर क्यों नहीं करता ?


*4. हरियाणा की कानून-व्यवस्था के लिए जवाबदेह कौन है ?*


जब भाजपा अराजकता समाप्त करने की बात करती है, तब हरियाणा की जनता को यह पूछने का पूरा अधिकार है कि प्रदेश सरकार ने उसकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आखिर कौन से ठोस कदम उठाए हैं।


महिलाओं के खिलाफ अपराध, बच्चों के विरुद्ध अपराध, हत्याएं, अपहरण, फिरौती, गैंगवार और आम नागरिकों में बढ़ती असुरक्षा की भावना गंभीर चिंता का विषय हैं और इन पर तत्काल ध्यान देने की आवश्यकता है।


राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) द्वारा प्रकाशित अपराध संबंधी आंकड़ों में हरियाणा उन राज्यों में शामिल रहा है, जहां दर्ज अपराधों की दर काफी अधिक है। राज्य सरकार को अपनी पुलिसिंग की प्राथमिकताओं, अपराध रोकने के उपायों, जांच के मानकों और दोषसिद्धि के प्रदर्शन पर जवाब देना चाहिए।


अमित शाह जी स्वयं केंद्रीय गृह मंत्री हैं। उन्हें बताना चाहिए कि हरियाणा की भाजपा सरकार ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए धरातल पर कौन से मापनीय और ठोस सुधार किए हैं।


*5. भारत का नाम रोशन करने वाली हरियाणा की बेटियों के साथ क्या हुआ था ?*


महिलाओं की सुरक्षा को लेकर भाजपा के दावों और उसके वास्तविक आचरण के बीच विरोधाभास को उजागर करने वाली घटनाओं में देश की प्रतिष्ठित महिला पहलवानों, जिनमें हरियाणा की ओलंपिक पदक विजेता और अंतरराष्ट्रीय स्तर की चैंपियन खिलाड़ी भी शामिल थीं, के साथ हुआ व्यवहार सबसे बड़ा उदाहरण है।


हरियाणा की इन बेटियों ने अपनी असाधारण खेल उपलब्धियों से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का नाम रोशन किया और भारत को गौरवान्वित किया। लेकिन जब उन्होंने भारतीय कुश्ती महासंघ के तत्कालीन अध्यक्ष के खिलाफ यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोप लगाते हुए न्याय की मांग की और दिल्ली के जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन किया, तो उन्हें वह सम्मान, संवेदनशीलता और संस्थागत सहयोग देने के बजाय पुलिस कार्रवाई का सामना करना पड़ा, जिसकी वे हकदार थीं।


28 मई, 2023 को जब इन पहलवानों ने नए संसद भवन की ओर मार्च करने का प्रयास किया, तब दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शनकारी पहलवानों को हिरासत में ले लिया और धरना स्थल को खाली करा दिया। ओलंपिक पदक विजेताओं और अंतरराष्ट्रीय चैंपियन खिलाड़ियों को घसीटकर हिरासत में लिए जाने की तस्वीरों ने पूरे देश को स्तब्ध कर दिया था।


उनकी मांग बिल्कुल स्पष्ट थी : न्याय, जवाबदेही और उनकी शिकायतों की निष्पक्ष जांच।


इसके बाद हुई कानूनी कार्यवाही भी लगातार गंभीर सार्वजनिक चिंता का विषय बनी रही है।


हम अमित शाह जी से पूछना चाहते हैं :


- देश का गौरव बढ़ाने वाली हरियाणा की बेटियों को जब शांतिपूर्ण तरीके से न्याय की मांग करने पर इस तरह अपमानित और प्रताड़ित क्यों किया गया ?

- प्रदर्शन कर रही महिला पहलवानों की शिकायतों को संवेदनशीलता और निष्पक्षता से सुनने के बजाय उनके खिलाफ पुलिस बल का इस्तेमाल क्यों किया गया ?

- जब देश का नाम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रोशन करने वाली बेटियां न्याय के लिए संघर्ष कर रही थीं, तब भाजपा नेतृत्व ने अपने तत्कालीन सांसद का साथ क्यों दिया ?

- क्या भाजपा का मानना है कि महिलाओं को पदक जीतने पर सम्मानित किया जाए, लेकिन जब वे जवाबदेही की मांग करें तो उनकी आवाज दबा दी जाए ?


हरियाणा की जनता अपनी इन बेटियों के साथ हुए अपमान को कभी नहीं भूलेगी। उनका संघर्ष केवल व्यक्तिगत शिकायतों तक सीमित नहीं था, बल्कि यह महिलाओं की गरिमा, शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार और इस सिद्धांत की लड़ाई थी कि राजनीतिक रूप से कितना भी प्रभावशाली व्यक्ति क्यों न हो, वह जवाबदेही से ऊपर नहीं हो सकता।


अमित शाह जी को बताना चाहिए कि महिलाओं की सुरक्षा के भाजपा के दावों और हरियाणा की इन गौरवशाली बेटियों के साथ किए गए व्यवहार में इतना बड़ा विरोधाभास क्यों है ?


*6. हरियाणा के किसानों की अनदेखी क्यों कर रही है भाजपा सरकार ? किसान आंदोलन को कुचलने के अपने अतीत का जवाब दें अमित शाह*


हरियाणा की अर्थव्यवस्था, सामाजिक संरचना और ग्रामीण जीवन की रीढ़ किसान हैं। लेकिन आज प्रदेश के किसान भाजपा सरकार की उपेक्षा, वादाखिलाफी और किसान-विरोधी नीतियों के चलते अनेक गंभीर समस्याओं और चुनौतियों का सामना कर रहे हैं।


किसानों को अपनी फसलों का उचित मूल्य, न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की कानूनी गारंटी, समय पर फसल खरीद, भुगतान में देरी, खाद-बीज और कृषि संबंधी आवश्यकताओं की उपलब्धता, बढ़ती कृषि लागत तथा फसल खराब होने पर उचित मुआवजे जैसे बुनियादी मुद्दों पर लगातार संघर्ष करना पड़ रहा है। मंडियों में अव्यवस्थाएं, खरीद प्रक्रिया में परेशानियां और किसानों की लंबित मांगें भाजपा सरकार की किसान नीति पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं।


हम अमित शाह जी से पूछना चाहते हैं कि हरियाणा के किसानों को अपनी ही फसल बेचने, उसका उचित मूल्य प्राप्त करने और अपनी मेहनत की कमाई का समय पर भुगतान सुनिश्चित कराने के लिए बार-बार सड़कों पर उतरने की नौबत क्यों आ रही है ?


अमित शाह जी को भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार का वह किसान-विरोधी रवैया भी याद करना चाहिए, जब वर्ष 2020-21 में देश के किसानों ने तीन कृषि कानूनों के खिलाफ ऐतिहासिक और शांतिपूर्ण आंदोलन किया था।


उस आंदोलन में हरियाणा और पंजाब के हजारों किसानों ने दिल्ली की सीमाओं पर महीनों तक शांतिपूर्ण धरना दिया। लेकिन किसानों की मांगों को संवेदनशीलता से सुनने और लोकतांत्रिक तरीके से समाधान निकालने के बजाय केंद्र सरकार ने उनके रास्ते में भारी बैरिकेडिंग, लोहे की कीलें, कंक्रीट की दीवारें और अन्य अवरोध खड़े कर दिए। दिल्ली में प्रवेश के रास्तों को इस तरह बंद किया गया, मानो देश के अन्नदाता अपने ही देश की राजधानी पर कोई हमला करने आ रहे हों।


इतना ही नहीं, भाजपा के कुछ नेताओं ने आंदोलनरत किसानों को आतंकवादी, खालिस्तानी और देशविरोधी तक कहकर अपमानित किया। यह देश के उन अन्नदाताओं का अपमान था, जो अपने अधिकारों और अपनी आजीविका की रक्षा के लिए लोकतांत्रिक तरीके से संघर्ष कर रहे थे।


उस आंदोलन के दौरान अनेक किसानों की जान चली गई। अंततः किसानों के ऐतिहासिक संघर्ष और एकजुटता के सामने केंद्र सरकार को तीनों कृषि कानून वापस लेने पड़े।


हम अमित शाह जी से पूछना चाहते हैं :


- जब देश के किसान अपनी जायज मांगों को लेकर शांतिपूर्ण आंदोलन कर रहे थे, तब भाजपा सरकार ने उनसे संवाद करने के बजाय दिल्ली की सीमाओं को किलेबंदी में क्यों बदल दिया था ?

- क्या किसानों को आतंकवादी और देशविरोधी बताने वाले भाजपा नेताओं के खिलाफ पार्टी ने कभी कोई जवाबदेही तय की ?

- आज हरियाणा के किसान MSP की कानूनी गारंटी, फसल खरीद, समय पर भुगतान और उचित मुआवजे जैसी मांगों को लेकर परेशान हैं, तो भाजपा सरकार उनकी समस्याओं का स्थायी समाधान क्यों नहीं निकाल रही है ?

- क्या भाजपा की नजर में किसानों का लोकतांत्रिक तरीके से अपनी मांगें उठाना तब भी अराजकता था और आज भी है ?


अमित शाह जी को यह समझना होगा कि किसानों की आवाज दबाने, उनके रास्तों में कीलें बिछाने और उन्हें अपमानित करने से लोकतंत्र मजबूत नहीं होता। लोकतंत्र की असली ताकत किसानों, मजदूरों और आम नागरिकों के अधिकारों का सम्मान करने तथा उनकी जायज मांगों का संवेदनशीलता से समाधान करने में है।


हरियाणा का किसान भाजपा सरकार से नारों और प्रचार की नहीं, बल्कि अपनी फसल के उचित मूल्य, सम्मानजनक जीवन और अपने अधिकारों की गारंटी की अपेक्षा करता है।


*7. क्या हरियाणा के मुख्यमंत्री ‘नॉन-रेजिडेंट हरियाणवी’ बन गए हैं ?*


हरियाणा को ऐसे मुख्यमंत्री की आवश्यकता है, जो निरंतर प्रदेश की जनता के लिए उपलब्ध रहें, उनकी रोजमर्रा की समस्याओं को समझें और प्रदेश की ज्वलंत समस्याओं को सर्वोच्च प्राथमिकता दें।


मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की हरियाणा से बाहर लगातार राजनीतिक व्यस्तताओं और विदेश यात्राओं ने इस बात पर सवाल खड़े किए हैं कि वे अपने ही प्रदेश के प्रशासन को कितना समय और ध्यान दे रहे हैं।


अक्टूबर में उनकी स्वीडन यात्रा को आधिकारिक तौर पर निवेश प्रोत्साहन से जुड़ी यात्रा बताया गया था। इसे प्रदेश में निवेश और औद्योगिक साझेदारियां आकर्षित करने के प्रयास के रूप में प्रस्तुत किया गया। सरकार को इस यात्रा के परिणामों का पूरा ब्यौरा सार्वजनिक करना चाहिए।


हरियाणा की जनता जानना चाहती है :


- मुख्यमंत्री हरियाणा की रोजमर्रा की समस्याओं के समाधान के लिए कितना समय देते हैं ?

- उनकी देश और विदेश की यात्राओं से प्रदेश को कौन से ठोस परिणाम प्राप्त हुए हैं ?

- उनकी अनुपस्थिति में प्रदेश की प्रशासनिक प्राथमिकताओं, कानून-व्यवस्था और जनता की लंबित शिकायतों की जिम्मेदारी कौन निभा रहा है ?


प्रदेश की जनता को ऐसा मुख्यमंत्री चाहिए, जो केवल सरकारी फोटो खिंचवाने और सार्वजनिक कार्यक्रमों में शामिल होने के लिए नहीं, बल्कि निरंतर शासन, जनसेवा और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए हरियाणा में उपलब्ध रहे।


*8. लोकतंत्र सवालों के जवाब देने से मजबूत होता है, सवाल पूछने वालों को अराजक बताने से नहीं*


भाजपा को समझना होगा कि चुनाव आयोग से सवाल पूछना, मतदाता सूचियों में पारदर्शिता की मांग करना, संवैधानिक संस्थाओं से जवाबदेही सुनिश्चित करने की मांग करना और नागरिकों की सुरक्षा से जुड़े मुद्दे उठाना लोकतंत्र के वैध और अनिवार्य दायित्व हैं।


कोई राजनीतिक मार्च सवालों के जवाबों का विकल्प नहीं हो सकता। कोई नारा जवाबदेही का विकल्प नहीं हो सकता। और वैध लोकतांत्रिक सवालों को अराजकता बताने की कोशिश से वे सवाल खत्म नहीं हो जाएंगे।


कल जब अमित शाह जी करनाल में भाजपा के मार्च का नेतृत्व करेंगे और अंबाला में जनसभा को संबोधित करेंगे, तब हरियाणा की जनता इन महत्वपूर्ण सवालों के जवाब की अपेक्षा करेगी।


गृह मंत्री को याद रखना चाहिए कि लोकतंत्र जनता का है, चुनावी संस्थाओं की निष्पक्षता में जनता का विश्वास सर्वोपरि है और सरकारें नागरिकों के प्रति जवाबदेह होती हैं।


*लोकतंत्र बचाने की असली कसौटी यह नहीं है कि कोई राजनीतिक दल कितनी जोर से नारे लगाता है, बल्कि यह है कि वह जनता के जनादेश और उसकी रक्षा के लिए जिम्मेदार संस्थाओं से जुड़े सवालों का कितनी पारदर्शिता और ईमानदारी से जवाब देता है।*



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