हरियाणा के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी, डारपुर प्राइमरी स्कूल में सभी 8 पद खाली; RTI में हुआ खुलासा


यमुनानगर: हरियाणा के यमुनानगर जिले में सरकारी स्कूलों की शिक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। सूचना का अधिकार (RTI) के तहत मिली जानकारी के अनुसार, जिले के कई सरकारी स्कूलों में शिक्षकों के स्वीकृत पद बड़ी संख्या में खाली पड़े हैं। हालात यह हैं कि कुछ स्कूलों में आधे से अधिक पद रिक्त हैं, जबकि डारपुर के प्राइमरी स्कूल में शिक्षकों के सभी आठ पद खाली बताए गए हैं। इन आंकड़ों ने सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों की शिक्षा और शिक्षण व्यवस्था को लेकर चिंता बढ़ा दी है।

कई स्कूलों में शिक्षकों के अधिकांश पद खाली

RTI से सामने आए आंकड़ों के अनुसार, यमुनानगर जिले के कई सरकारी स्कूल शिक्षकों की कमी से जूझ रहे हैं। खदरी सीनियर सेकेंडरी स्कूल में शिक्षकों के कुल 23 पद स्वीकृत हैं, जिनमें से 9 पद खाली हैं।

वहीं, छछरौली ब्लॉक के कोट कलसिया सीनियर सेकेंडरी स्कूल में कुल 25 स्वीकृत पदों में से 16 पद रिक्त बताए गए हैं। इससे स्कूल में शिक्षकों की उपलब्धता को लेकर स्थिति की गंभीरता का अंदाजा लगाया जा सकता है।

डारपुर सीनियर सेकेंडरी स्कूल में 23 में से 19 पद खाली

डारपुर सीनियर सेकेंडरी स्कूल में भी शिक्षकों की कमी के आंकड़े सामने आए हैं। यहां शिक्षकों के कुल 23 पद स्वीकृत हैं, लेकिन इनमें से केवल 4 पदों पर ही शिक्षक कार्यरत बताए गए हैं। शेष 19 पद खाली हैं।

इस तरह स्कूल में स्वीकृत पदों के मुकाबले शिक्षकों की संख्या काफी कम है, जिसका असर विद्यार्थियों की पढ़ाई पर पड़ने की आशंका है।

प्राइमरी और मिडिल स्कूलों में भी चिंताजनक स्थिति

प्राथमिक और मिडिल स्कूलों में भी शिक्षकों के रिक्त पदों की समस्या सामने आई है।

  • डारपुर प्राइमरी स्कूल: शिक्षकों के सभी 8 पद खाली।
  • दौलतपुर मिडिल स्कूल: कुल 6 पदों में से 5 रिक्त।
  • जाटावाला मिडिल स्कूल: कुल 8 पदों में से 7 खाली।
  • एक अन्य मिडिल स्कूल: सभी स्वीकृत पद खाली होने की जानकारी सामने आई है।

इन आंकड़ों से स्पष्ट होता है कि शिक्षकों की कमी केवल सीनियर सेकेंडरी स्कूलों तक सीमित नहीं है, बल्कि प्राथमिक और माध्यमिक स्तर पर भी यह समस्या मौजूद है।

बच्चों की पढ़ाई पर क्या होगा असर?

सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी का सीधा असर विद्यार्थियों की पढ़ाई, पाठ्यक्रम पूरा होने और शिक्षा की गुणवत्ता पर पड़ सकता है। ऐसे में सवाल उठता है कि जब स्कूलों में पर्याप्त शिक्षक उपलब्ध नहीं होंगे, तो विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा कैसे मिल पाएगी?

अब निगाहें शिक्षा विभाग पर हैं कि इन रिक्त पदों को भरने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी दूर करना विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक अवसर उपलब्ध कराने के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

नोट: ये आंकड़े सुमितपाल द्वारा सामने रखी गई RTI जानकारी पर आधारित हैं। संबंधित विभाग की ओर से रिक्त पदों को भरने के लिए उठाए गए कदमों या इस संबंध में आधिकारिक प्रतिक्रिया की जानकारी उपलब्ध होने पर खबर को अपडेट किया जा सकता है।

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