चंडीगढ़: आम आदमी पार्टी हरियाणा के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. सुशील गुप्ता ने राज्य की मंडियों में धान खरीद की बदहाली को लेकर प्रदेश की सैनी सरकार पर करारा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि सरकार की प्रशासनिक नाकामी और मनमानी शर्तों के कारण आज हरियाणा का किसान अपनी ही फसल बेचने के लिए दर-दर भटकने और जान देने तक को मजबूर हो चुका है। अन्नदाता 15-15 दिनों से मंडियों में रातें बिताने को मजबूर हैं, लेकिन उनकी कोई सुनवाई नहीं हो रही।
डॉ. सुशील गुप्ता ने सैनी सरकार की फसल खरीद विफलता पर कटाक्ष करते हुए कहा कि आजकल हरियाणा के मुख्यमंत्री पंजाब में जाकर ढोंग करते हैं और किसानों से सरेआम झूठ बोलते हैं कि हरियाणा में 24 फसलों की MSP पर सभी किसानों की पूरी फसल उत्पादन की खरीद की जाती है जबकि सच्चाई इसके बिल्कुल उल्ट है। क्योंकि हरियाणा के किसान धान बिक्री के लिए बहुत परेशान हैं अभी हाल ही में घरौण्डा करनाल में एक किसान की धान फसल की बिक्री 7-8 दिन तक नहीं होने एवं अधिकारियों द्वारा परेशान करने से ज़हर पीकर आत्महत्या करने की कोशिश की। ऐसी दर्दनाक घटनाएं हो रही है और सीएम सैनी दूसरे प्रदेशों में जाकर झूठी वाहवाही बटोर रहे हैं। जींद, करनाल, कुरुक्षेत्र समेत सभी जिलों के किसान धान बिक्री के लिए बहुत परेशान हैं और सीएम सैनी सिंगापुर में इवेंट बाज़ी कर रहे हैं।उन्होंने कहा भाजपा सरकार 24 फसलों पर न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) देने का झूठा प्रचार करके प्रदेश की जनता को गुमराह कर रही है। डॉ. सुशील गुप्ता ने चुनौती देते हुए कहा कि मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी पवित्र गंगाजल हाथ में लेकर उन 24 फसलों के नाम सार्वजनिक करें, जिनकी खरीद वास्तव में MSP पर की जा रही है। जमीनी हकीकत यह है कि किसानों को मुख्य फसलों का भी उचित मूल्य नहीं मिल पा रहा है।
*जटिल खरीद प्रक्रिया से किसान परेशान* रजिस्ट्रेशन, नमी और गेट पास की गलत शर्तों में उलझा रही सरकार
सरकार का पूरा सिस्टम किसानों को राहत देने के बजाय उन्हें परेशान करने में लगा है। कभी ‘मेरी फसल-मेरा ब्योरा’ पोर्टल के रजिस्ट्रेशन के नाम पर, तो कभी नमी की सख्त शर्तों और गेट पास काटने में देरी करके किसानों को परेशान किया जा रहा है। इन जटिल प्रक्रियाओं का एकमात्र मकसद खरीद में देरी करना और किसानों को निजी व्यापारियों के हाथों औने-पौने दाम पर फसल बेचने के लिए मजबूर करना है।
मंडियों में करीब 9 लाख टन धान खुले में पड़ा, और खरीद सिर्फ 30% एवं उठान केवल 17% हुआ है जोकि ना के बराबर है।
हरियाणा की मंडियों में प्रशासनिक बदइंतजमी का आलम यह है कि 9 लाख टन से अधिक धान खुले आसमान के नीचे पड़ा हुआ है, और मौसम विभाग ने अगले 5 दिन 12 अक्टूबर तक हरियाणा में बारिश बताई है लेकिन सैनी सरकार किसानों द्वारा दिन-रात मेहनत करके तैयार फसल को औने-पौने दामों में बेचने को मजबूर कर रही हैं। फसल उठान और सरकारी खरीद की धीमी रफ्तार के कारण करोड़ों रुपये की फसल खराब होने की कगार पर है, लेकिन सरकार आंखें मूंदे बैठी है।
*सैनी सरकार का सिस्टम पूरी तरह नाकाम*
15-15 दिनों तक मंडियों में रहने को मजबूर किसान, सिस्टम पूरी तरह नाकाम
अपनी गाढ़ी कमाई की फसल बेचने आया किसान मंडियों में 15-15 दिनों तक भूखा-प्यासा पड़ा रहने को मजबूर है। न तो मंडियों में किसानों के रुकने का कोई इंतजाम है और न ही उनकी फसल की समय पर तुलाई हो रही है। सैनी सरकार का पूरा प्रशासनिक ढांचा ध्वस्त हो चुका है और उसकी नाकामी का खामियाजा प्रदेश के अन्नदाता को भुगतना पड़ रहा है।
*किसान आत्महत्या को मजबूर*
फसल बिक्री न होने से परेशान किसान आत्महत्या को मजबूर, महीनों की मेहनत के बाद भी जब किसान की फसल बिक नहीं रही है, तो वह कर्ज और परिवार के पालन-पोषण की चिंता में चरम मानसिक तनाव झेल रहा है। हालात इतने भयानक हो चुके हैं कि प्रदेश का किसान जान देने जैसा आत्मघाती कदम उठाने को मजबूर हो रहा है। आम आदमी पार्टी मांग करती है कि सरकार तुरंत अपनी जनविरोधी शर्तें हटाए, खरीद की गति बढ़ाए और मंडियों से धान का त्वरित उठान सुनिश्चित करे।

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