महात्मा गांधी की शिक्षाएं आज भी प्रासंगिक, शास्त्री जी का सादगीपूर्ण जीवन प्रेरणास्रोत: राज्यपाल कविंद्र गुप्ता

 शिमला : राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की जयंती के अवसर पर शिमला में कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में राज्यपाल कविंद्र गुप्ता ने कहा कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने ‘अहिंसा परमो धर्म’ का मंत्र देकर आजादी के आंदोलन में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उन्होंने कहा कि आजादी के संघर्ष के दौरान महात्मा गांधी ने सभी लोगों को साथ लेकर चलने का संकल्प लिया और देशवासियों में जागृति पैदा की। इसी का परिणाम है कि आज देश लोकतंत्र और आजादी का आनंद ले रहा है।


राज्यपाल ने कहा कि आज उन सभी शहीदों को याद करने की जरूरत है, जिनके बलिदान के कारण देश को आजादी मिली। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी हमारे लिए आदर्श, प्रेरणास्रोत और मार्गदर्शक हैं। उनकी शिक्षाएं आज के दौर में भी पूरी तरह प्रासंगिक हैं और समाज को सही दिशा देने का काम करती हैं।


उन्होंने कहा कि शांति स्थापित करने के लिए देश का शक्तिशाली होना भी आवश्यक है। उन्होंने कहा, “साधना ही मुक्ति का शुभ द्वार है और शक्ति ही शांति का आधार है।” देश को मजबूत बनाने की आवश्यकता है, ताकि कोई दुश्मन देश भारत पर किसी भी प्रकार का प्रहार करने का साहस न कर सके।

राज्यपाल ने पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री को याद करते हुए कहा कि वर्ष 1965 के युद्ध में उनके नेतृत्व और मार्गदर्शन में देश ने जिस प्रकार विजय हासिल की, वह आज भी सभी के लिए प्रेरणास्रोत है। उन्होंने कहा कि राजनीति में स्वच्छता, शुचिता और अपने आदर्शों के प्रति प्रतिबद्धता का जो मानदंड लाल बहादुर शास्त्री ने स्थापित किया, वह अपने आप में महत्वपूर्ण है।

उन्होंने कहा कि आज भी देश को ऐसे राजनेताओं से प्रेरणा लेने की जरूरत है, जिन्होंने देश और समाज के लिए अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया और सादगीपूर्ण जीवन जीते हुए अपने आदर्शों को कायम रखा। ऐसे नेताओं के जीवन और विचार वर्तमान पीढ़ी के लिए भी प्रेरणा का स्रोत हैं।

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