किसान नेता गुरनाम सिंह चढूनी ने कहा कि इस मामले में 20 सदस्यीय कमेटी बनाई गई है, जो आगे पूरे आंदोलन को देखेगी। उन्होंने कहा कि मामले में आरोपी बनाए गए रवि आजाद की ओर से सीबीआई जांच की मांग की जा रही है। चढूनी के मुताबिक, परिवार ने रवि की लोकेशन और जीपीएस से जुड़े रिकॉर्ड पुलिस को उपलब्ध कराए हैं, लेकिन उनका आरोप है कि इन सबूतों को जांच में शामिल नहीं किया गया।
गुरनाम सिंह चढूनी ने यह भी कहा कि पंचायत में पूर्व विधायक जेपी दलाल को लेकर भी कुछ लोगों द्वारा बातें रखी गईं। उन्होंने कहा कि पंचायत में सामने आई बातों के आधार पर अब कमेटी आगे का निर्णय लेगी।
वहीं, भारतीय किसान यूनियन चढूनी की महिला प्रदेश अध्यक्ष सुमन हुड्डा ने कहा कि रवि आजाद करीब साढ़े नौ महीने से जेल में बंद हैं और किसान संगठन तथा खाप प्रतिनिधि उनके मामले में निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यदि जांच में रवि आजाद दोषी पाए जाते हैं तो संगठन पीड़ित बच्ची के साथ खड़ा होगा, लेकिन यदि वह निर्दोष हैं तो उनके खिलाफ कार्रवाई क्यों जारी रखी जा रही है, यह सवाल उठता है।
सुमन हुड्डा ने रवि आजाद के परिवार की स्थिति का जिक्र करते हुए कहा कि लंबे समय से जेल में रहने के कारण परिवार परेशान है। उन्होंने मामले में राजनीतिक साजिश के आरोपों की निष्पक्ष जांच किए जाने की मांग उठाई।
वहीं लोहारू हलके के गांव मिठी के किसान प्रतिनिधि ने आरोप लगाया कि रवि आजाद को राजनीतिक साजिश के तहत फंसाया गया है। उन्होंने कहा कि मामले में लगातार तारीखें आगे बढ़ने और परिवार को परेशानी होने से लोगों में रोष है। किसान प्रतिनिधि ने प्रशासन और न्यायपालिका से मामले को निष्पक्ष तरीके से देखने की अपील की।
पंचायत में मौजूद किसान संगठनों और खाप प्रतिनिधियों ने रवि आजाद मामले में निष्पक्ष जांच और न्याय की मांग को लेकर आगे की रणनीति 20 सदस्यीय कमेटी के माध्यम से तय करने की बात कही।
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