पंजाब में नशे को लेकर राहुल गांधी का AAP सरकार पर हमला, बोले- ‘खतरनाक पैटर्न’ पर सरकार जवाब दे


नई दिल्ली/चंडीगढ़: कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने पंजाब में नशे के मुद्दे को लेकर आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में नशे के खिलाफ लिखा कि पंजाब की AAP सरकार में एक “खतरनाक पैटर्न” दिखाई दे रहा है। उन्होंने कहा कि जब कोई सरकारी नाकामी पर सवाल करता है तो उसे जवाब की जगह धमकी और कथित तौर पर कथित विफलता पर सवाल पूछने वाले गुलजार सिंह जी का जिक्र किया। राहुल गांधी के मुताबिक, गुलजार सिंह को अपने बेटे के नशे का शिकार बनने के बाद कथ आवाज उठाने वालों को परेशान और प्रताड़ित किया जा रहा है।

राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट साझा करते हुए लिखा कि पंजाब की AAP सरकार में एक “खतरनाक पैटर्न” दिखाई दे रहा है। उन्होंने कहा कि जब कोई सरकारी नाकामी पर सवाल करता है तो उसे जवाब की जगह धमकी और कथित तौर पर प्रताड़ना का सामना करना पड़ता है।

उन्होंने पंजाब के कैबिनेट मंत्री से नशे के कारोबार को रोकने में सरकार की कथित विफलता पर सवाल पूछने वाले गुलजार सिंह जी का जिक्र किया। राहुल गांधी के मुताबिक, गुलजार सिंह को अपने बेटे के नशे का शिकार बनने के बाद कथित तौर पर इतना प्रताड़ित और अपमानित किया गया कि उन्हें माफी मांगने के लिए दबाव बनाया गया।

राहुल गांधी ने दावा किया कि गुलजार सिंह एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल भटकते रहे और आखिरकार उनकी हालत बिगड़ने के बाद उनकी मौत हो गई। उन्होंने यह भी कहा कि पिछले हफ्ते उन्होंने एक युवा मोहिंदर सिंह से मुलाकात की थी, जिन्हें मुख्यमंत्री भगवंत मान के खिलाफ प्रदर्शन करने पर कथित रूप से प्रताड़ित किया गया।

स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की मांग

कांग्रेस नेता ने कहा कि सरकार का काम जनता को जवाब देना है, सवाल पूछने वालों को चुप कराना नहीं। उन्होंने गुलजार सिंह की कथित मौत की पूरी जांच की मांग करते हुए कहा कि एक स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और FIR में जिम्मेदार लोगों के नाम दर्ज किए जाने चाहिए।

राहुल गांधी ने अपने पोस्ट में कहा कि पंजाब के युवाओं को नशे से बचाने और राज्य में कानून-व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए सरकार को जवाबदेही तय करनी होगी।

नोट: ऊपर की खबर उपलब्ध सोशल मीडिया पोस्ट में किए गए दावों पर आधारित है। गुलजार सिंह की मौत और कथित प्रताड़ना से जुड़े आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है।


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