हिमाचल में कमजोर पड़ा मानसून, 25 सितंबर तक विदाई के आसार; अगले छह दिन मौसम रहेगा साफ

शिमला। हिमाचल प्रदेश में मानसून अब कमजोर पड़ने लगा है और प्रदेश में इसके विदा होने के लिए परिस्थितियां अनुकूल बन रही हैं। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार अगले छह दिनों के दौरान राज्य के अधिकांश हिस्सों में बारिश की संभावना नहीं है। हालांकि आज और कल मध्य व निचले पहाड़ी क्षेत्रों में कुछ स्थानों पर हल्की बूंदाबांदी हो सकती है, जबकि ज्यादातर क्षेत्रों में मौसम साफ रहने और धूप खिलने के आसार हैं। मौसम साफ रहने से दिन के तापमान में हल्की बढ़ोतरी दर्ज की जा सकती है।

मौसम विभाग के अनुसार 21 से 24 सितंबर तक पूरे प्रदेश में मौसम साफ रहने की संभावना है। इस अवधि में बारिश के कोई विशेष आसार नहीं हैं। इसके साथ ही अगले एक सप्ताह के दौरान हिमाचल प्रदेश से मानसून की विदाई होने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि मानसून की आधिकारिक वापसी की तारीख परिस्थितियों पर निर्भर करेगी।

मौसम विज्ञानी संदीप शर्मा के अनुसार मानसून की वापसी के लिए मौजूदा परिस्थितियां अनुकूल नजर आ रही हैं। उन्होंने बताया कि 19 सितंबर से राजस्थान के कुछ हिस्सों से मानसून की वापसी शुरू होने की संभावना है। हालांकि हिमाचल प्रदेश से मानसून की वास्तविक विदाई कब होगी, इसे लेकर अभी निश्चित रूप से कुछ कहना जल्दबाजी होगी। हिमाचल प्रदेश से मानसून की वापसी की सामान्य तारीख 25 सितंबर मानी जाती है।

मानसून ने प्रदेश को दिया ₹3,213 करोड़ का नुकसान

इस मानसून सीजन में भारी बारिश, भूस्खलन, बाढ़ और अन्य प्राकृतिक घटनाओं से हिमाचल प्रदेश को बड़े पैमाने पर नुकसान हुआ है। 1 जून से 18 सितंबर तक प्रदेश में मानसून से करीब ₹3,213 करोड़ का नुकसान दर्ज किया गया है। अकेले लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) को करीब ₹2,744 करोड़ की चपत लगी है।

मानसून के दौरान प्रदेश में 137 मकान पूरी तरह जमीदोज हो गए, जबकि 521 घरों को आंशिक नुकसान पहुंचा है। इसके अलावा सड़क हादसों, भूस्खलन, डूबने और फ्लैश फ्लड जैसी घटनाओं ने भी बड़ी संख्या में लोगों की जान ली है।

1 जून से 18 सितंबर तक मानसून सीजन में कुल 325 लोगों की मौत हुई है। इनमें सबसे अधिक 194 मौतें सड़क हादसों में हुईं। वहीं 18 लोगों की जान भूस्खलन, 17 लोगों की पानी में डूबने और एक व्यक्ति की फ्लैश फ्लड में गई। मानसून की विदाई के साथ प्रदेश में बारिश से राहत मिलने की उम्मीद है, लेकिन मानसून सीजन में हुए भारी नुकसान ने राज्य के सामने पुनर्निर्माण और प्रभावित परिवारों की मदद की बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है।


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