ट्राइडेंट ग्रुप और पंजाब यूनिवर्सिटी की साझेदारी से राष्ट्रीय स्तर के हैकाथॉन ‘डिकार्बोनिक्स 1.0’ का आयोजन
चंडीगढ़/पंजाब: ट्राइडेंट ग्रुप और पंजाब यूनिवर्सिटी के यूनिवर्सिटी इंस्टीट्यूट ऑफ केमिकल इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (डॉ. एसएसबीयूआईसीईटी) के सहयोग से राष्ट्रीय स्तर के हैकाथॉन ‘डिकार्बोनिक्स 1.0’ का आयोजन किया गया। यह हैकाथॉन औद्योगिक कार्बन उत्सर्जन में कमी और टिकाऊ औद्योगिक विकास से जुड़ी वास्तविक चुनौतियों पर केंद्रित था। इसका ग्रैंड फिनाले 18 और 19 सितंबर को आयोजित हुआ, जिसमें देश के प्रमुख शिक्षण संस्थानों से चयनित 23 टीमों ने हिस्सा लिया।
हैकाथॉन के प्रारंभिक चरण में देशभर से 174 टीमों ने भाग लिया। ये टीमें 21 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 86 शिक्षण संस्थानों से थीं। फाइनल के लिए चयनित टीमों में आईआईटी रुड़की, आईआईटी जम्मू, आईआईटी मंडी, एनआईटी जालंधर, एनआईटी हमीरपुर, अन्ना यूनिवर्सिटी, लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी और पंजाब यूनिवर्सिटी सहित कई प्रमुख संस्थानों के विद्यार्थी शामिल रहे।
‘डिकार्बोनिक्स 1.0’ का उद्देश्य विद्यार्थियों को औद्योगिक क्षेत्र की वास्तविक चुनौतियों से जोड़ना और उन्हें व्यावहारिक तथा आर्थिक रूप से व्यवहार्य समाधान विकसित करने का अवसर देना था। प्रतियोगिता में एकीकृत कपड़ा एवं कागज निर्माण परिसर को आधार बनाते हुए प्रतिभागियों से कार्बन उत्सर्जन कम करने के संभावित उपायों की पहचान करने के साथ-साथ उनके व्यावसायिक उपयोग और क्रियान्वयन की संभावनाओं का आकलन करने को कहा गया।
इस पहल का आयोजन एवं प्रबंधन यूआईसीईटी, पंजाब यूनिवर्सिटी, चंडीगढ़ द्वारा किया गया, जबकि ट्राइडेंट ग्रुप ने औद्योगिक साझेदार और पुरस्कार राशि प्रायोजक के रूप में सहयोग किया।
ग्रैंड फिनाले के दौरान प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए ट्राइडेंट ग्रुप की ग्रुप सीएचआरओ पूजा लूथरा ने प्रतिभागियों के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने उनके नवाचार, रचनात्मक सोच और टिकाऊ औद्योगिक समाधान विकसित करने के प्रति प्रतिबद्धता की प्रशंसा की।
फाइनल में प्रस्तुत परियोजनाओं का मूल्यांकन ट्राइडेंट ग्रुप के उद्योग विशेषज्ञों और शैक्षणिक क्षेत्र के विशेषज्ञों की संयुक्त जूरी ने किया। प्रतियोगिता में कुल 1.75 लाख रुपए की पुरस्कार राशि रखी गई थी। इसमें प्रथम पुरस्कार 75 हजार रुपए, द्वितीय पुरस्कार 50 हजार रुपए तथा दो तृतीय पुरस्कार 25-25 हजार रुपए के थे।
जूरी के समक्ष प्रस्तुतियों और विस्तृत विचार-विमर्श के बाद विजेता टीमों की घोषणा की गई। पुणे की एमआईटी-वर्ल्ड पीस यूनिवर्सिटी की टीम ने प्रथम पुरस्कार के रूप में 75 हजार रुपए हासिल किए। आईआईटी रुड़की की टीम को द्वितीय पुरस्कार के रूप में 50 हजार रुपए मिले। वहीं एसीटेक कैंपस, अन्ना यूनिवर्सिटी और यूआईसीईटी, पंजाब यूनिवर्सिटी, चंडीगढ़ की टीमों ने संयुक्त रूप से तृतीय पुरस्कार हासिल किया। दोनों टीमों को 25-25 हजार रुपए की पुरस्कार राशि दी गई।
विजेता टीमों को औद्योगिक कार्बन उत्सर्जन में कमी से जुड़े जटिल सवालों के लिए नवोन्मेषी और व्यावहारिक समाधान प्रस्तुत करने के लिए सम्मानित किया गया। ‘डिकार्बोनिक्स 1.0’ के माध्यम से ट्राइडेंट ग्रुप ने विद्यार्थियों को वास्तविक विनिर्माण क्षेत्र की चुनौतियों को समझने और अपने ज्ञान का उपयोग उद्योग से जुड़े टिकाऊ विकास के मुद्दों के समाधान में करने का अवसर प्रदान किया।
इस पहल ने उद्योग और शिक्षण संस्थानों के बीच सहयोग के महत्व को भी सामने रखा। इसके माध्यम से नवाचार को बढ़ावा देने, विद्यार्थियों में भविष्य की औद्योगिक जरूरतों के अनुरूप कौशल विकसित करने और कम कार्बन वाली अर्थव्यवस्था के लिए व्यावहारिक समाधान तैयार करने की दिशा में प्रयास किया गया।

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