चंडीगढ़: भारतीय वायु सेना की नंबर 14 स्क्वाड्रन, जिसे लोकप्रिय रूप से 'बुल्स' के नाम से जाना जाता है, ने 19 सितंबर 2026 को अपनी विशिष्ट सेवा की प्लेटिनम जुबली मनाई। 1951 में स्क्वाड्रन लीडर एल.आर.डी. ब्लंट की कमान में स्थापित इस स्क्वाड्रन को शुरुआत में 'स्पिटफायर' विमानों से लैस किया गया था। इस इकाई ने स्पिटफायर, वैम्पायर, हंटर और जगुआर विमानों का सफलतापूर्वक संचालन किया है, जो भारतीय वायु सेना की हवाई युद्ध क्षमता के क्रमिक विकास को दर्शाता है।
स्क्वाड्रन की वीरता और उत्कृष्ट युद्ध-कौशल की एक गौरवशाली विरासत है। 1965 के भारत-पाक युद्ध के दौरान, फ्लाइट लेफ्टिनेंट ए.टी. कुक और फ्लाइंग ऑफिसर एस. ममगाईं ने पाकिस्तानी 'सेबर' विमानों के खिलाफ इसकी पहली हवाई जीत हासिल की थी, जिसके लिए उन्हें अदम्य साहस हेतु 'वीर चक्र' से सम्मानित किया गया था। 14 दिसंबर 1971 को, जेसोर में दुश्मन के कब्जे वाले हवाई अड्डे को अपने नियंत्रण में लेकर वहां से उड़ान भरने (ऑपरेट करने) वाली पहली वायु सेना स्क्वाड्रन बनकर इसने इतिहास रच दिया।
1979 में एक नए युग की शुरुआत करते हुए, यह स्क्वाड्रन 'डीप पेनिट्रेशन स्ट्राइक एयरक्राफ्ट' (दुश्मन के इलाके में गहराई तक मार करने वाले विमान) 'जगुआर' को शामिल करने वाली वायु सेना की पहली ऑपरेशनल यूनिट बन गई। इसने बालाकोट ऑपरेशन के दौरान शानदार युद्ध-कौशल का प्रदर्शन किया और ISR (इंटेलिजेंस, सर्विलांस और रिकॉनिसेंस - खुफिया, निगरानी और टोही) अभियानों में अपनी उत्कृष्ट उपलब्धियों के लिए इसे 'चीफ ऑफ द एयर स्टाफ यूनिट प्रशस्ति पत्र' (Chief of the Air Staff Unit Citation) से सम्मानित किया गया। अपने आदर्श वाक्य "बलं जयाय" (शक्ति से विजय मिलती है) से निर्देशित, यह स्क्वाड्रन वीरता और सटीकता की अपनी गौरवशाली विरासत को निरंतर आगे बढ़ा रही है।
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जन संपर्क (रक्षा) चंडीगढ़

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