HPU स्वायत्तता के लिए HPUTWA का ‘विश्वविद्यालय बचाओ अभियान’ 21वें दिन भी जारी

शिमला:हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय की स्वायत्तता, अकादमिक स्वतंत्रता, संस्थागत गरिमा एवं CAS की बहाली की मांग को लेकर हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय शिक्षक कल्याण संघ (HPUTWA) का ‘विश्वविद्यालय बचाओ अभियान’ मंगलवार को 21वें दिन भी जारी रहा। विश्वविद्यालय परिसर में कुलपति कार्यालय के बाहर शिक्षकों ने धरना देकर विश्वविद्यालय की स्वायत्तता, लोकतांत्रिक कार्यप्रणाली और अकादमिक हितों की रक्षा की मांग दोहराई।



आज के धरने को डॉ. नरेश (हिंदी), डॉ. सीमा (महिला अध्ययन), डॉ. प्रियंका वैद्य (अंग्रेज़ी), प्रो. चंद्रमोहन (ITHM) तथा डॉ. मनोहर (शारीरिक शिक्षा) ने संबोधित किया।


डॉ. नरेश, हिंदी विभाग


डॉ. नरेश ने कहा कि विश्वविद्यालय केवल एक प्रशासनिक संस्था नहीं, बल्कि ज्ञान, भाषा, साहित्य और विचारों के स्वतंत्र विकास का महत्वपूर्ण केंद्र है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय की अकादमिक परंपराओं और स्वायत्त निर्णय लेने की क्षमता को सुरक्षित रखना आवश्यक है। उन्होंने शिक्षकों से विश्वविद्यालय की गरिमा और अकादमिक स्वतंत्रता के लिए एकजुट रहने का आह्वान किया।


डॉ. सीमा, महिला अध्ययन


डॉ. सीमा ने कहा कि विश्वविद्यालय की स्वायत्तता का संबंध केवल प्रशासनिक निर्णयों से नहीं, बल्कि समान अवसर, समावेशिता और अकादमिक स्वतंत्रता से भी है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय में नीतियां और निर्णय व्यापक संवाद तथा सभी हितधारकों की भागीदारी के साथ लिए जाने चाहिए। उन्होंने विश्वविद्यालय को और अधिक लोकतांत्रिक एवं समावेशी बनाने की आवश्यकता पर बल दिया।


डॉ. प्रियंका वैद्य, अंग्रेज़ी विभाग


डॉ. प्रियंका वैद्य ने कहा कि उच्च शिक्षा संस्थानों में शिक्षकों की अकादमिक स्वतंत्रता और पेशेवर विकास विश्वविद्यालय की गुणवत्ता से सीधे जुड़े हुए हैं। उन्होंने Career Advancement Scheme (CAS) की बहाली की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि शिक्षकों के कैरियर विकास के लिए एक पारदर्शी और प्रभावी व्यवस्था आवश्यक है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय के अकादमिक वातावरण को मजबूत करने के लिए शिक्षकों के मुद्दों का संस्थागत स्तर पर समाधान किया जाना चाहिए।


प्रो. चंद्रमोहन, ITHM


प्रो. चंद्रमोहन ने कहा कि हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय ने शिक्षा, शोध और मानव संसाधन विकास के क्षेत्र में लंबे समय से महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय की संस्थागत पहचान और अकादमिक परंपराओं को बनाए रखते हुए भविष्य की नीतियां तैयार की जानी चाहिए। उन्होंने विश्वविद्यालय से जुड़े महत्वपूर्ण निर्णयों में संवाद, पारदर्शिता और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को महत्व देने की आवश्यकता पर बल दिया।


डॉ. मनोहर, शारीरिक शिक्षा विभाग


डॉ. मनोहर ने कहा कि शारीरिक शिक्षा और खेल विश्वविद्यालय की समग्र शैक्षणिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय के सभी शैक्षणिक क्षेत्रों के विकास के लिए पर्याप्त संसाधन, आधारभूत ढांचा और संस्थागत सहयोग आवश्यक है। उन्होंने विश्वविद्यालय की स्वायत्तता को मजबूत करते हुए शिक्षण, शोध, खेल और अन्य शैक्षणिक गतिविधियों के लिए बेहतर सुविधाएं उपलब्ध करवाने की आवश्यकता पर बल दिया।


21 दिनों से जारी है ‘विश्वविद्यालय बचाओ अभियान’


HPUTWA के ‘विश्वविद्यालय बचाओ अभियान’ के 21वें दिन भी शिक्षकों ने अपनी मांगों को शांतिपूर्ण एवं लोकतांत्रिक तरीके से उठाया। संगठन की प्रमुख मांगों में विश्वविद्यालय की स्वायत्तता की रक्षा, अकादमिक स्वतंत्रता को सुरक्षित रखना तथा CAS की बहाली शामिल हैं।


HPUTWA का कहना है कि विश्वविद्यालय से जुड़े नीतिगत एवं प्रशासनिक विषयों का समाधान संस्थागत प्रक्रियाओं, संवाद और लोकतांत्रिक तरीके से किया जाना चाहिए। संगठन ने कहा कि जवाबदेही और पारदर्शिता आवश्यक हैं, लेकिन इनके साथ विश्वविद्यालय की स्वायत्तता और अकादमिक स्वतंत्रता को भी सुरक्षित रखा जाना चाहिए।


संगठन ने विश्वविद्यालय के शिक्षकों, कर्मचारियों, शोधार्थियों और विद्यार्थियों से विश्वविद्यालय की स्वायत्तता, अकादमिक स्वतंत्रता एवं संस्थागत गरिमा से जुड़े मुद्दों पर एकजुट रहने का आह्वान किया।

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