BRICS के गाला डिनर में छाया हिमाचल का स्वाद, मेन्यू में शामिल हुई ‘गुच्छी मर्मिक’ Morel Mushroom | GUCCHI MUSHROOMS
नई दिल्ली: BRICS गाला डिनर के खास मेन्यू में भारतीय व्यंजनों की समृद्ध विविधता देखने को मिली। इस मेन्यू में हिमाचल प्रदेश के मशहूर गुच्छी मर्मिक को भी खास जगह दी गई, जिसने पारंपरिक हिमाचली स्वाद को अंतरराष्ट्रीय मंच पर पहचान दिलाई।
गाला डिनर के मेन्यू में खंडवी मिल-फ्यॉ, खुंब गलौटी, पनीर लबाबदार, गुच्छी मर्मिक, मिलेट पुलाव और विभिन्न प्रकार की भारतीय ब्रेड शामिल रहीं। डिनर के अंत में मेहमानों के लिए ओल्ड दिल्ली फ्रूट क्रीम विद जलेबी और शहतूत फिरनी जैसे पारंपरिक भारतीय डेजर्ट भी परोसे गए।
हिमाचल की गुच्छी, जिसे एक बेहद खास और प्रीमियम जंगली मशरूम माना जाता है, अपने विशिष्ट स्वाद और खुशबू के लिए जानी जाती है। गाला डिनर के मेन्यू में गुच्छी मर्मिक का शामिल होना हिमाचली खान-पान और स्थानीय व्यंजनों की बढ़ती पहचान को दर्शाता है।
BRICS जैसे अंतरराष्ट्रीय आयोजन में देश के अलग-अलग हिस्सों के पारंपरिक व्यंजनों को शामिल किए जाने से भारतीय खान-पान की विविधता और क्षेत्रीय स्वादों को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करने का अवसर मिला।
जंगलों में प्राकृतिक रूप से उगती है गुच्छी
गुच्छी को अंग्रेजी में Morel Mushroom कहा जाता है। यह हिमालयी क्षेत्र में प्राकृतिक रूप से उगने वाला एक जंगली मशरूम है। इसकी व्यावसायिक खेती बड़े पैमाने पर अभी भी आसान नहीं है, इसलिए बाजार में उपलब्ध गुच्छी का बड़ा हिस्सा प्राकृतिक जंगलों से एकत्र किया जाता है।
हिमाचल प्रदेश में गुच्छी खास तौर पर ऊंचाई वाले पहाड़ी और वन क्षेत्रों में पाई जाती है। इसे स्थानीय लोग जंगलों से खोजकर इकट्ठा करते हैं। इसकी पैदावार मौसम, बारिश, तापमान और प्राकृतिक परिस्थितियों पर काफी निर्भर करती है, इसलिए हर साल इसकी उपलब्धता एक जैसी नहीं रहती।
मार्च-अप्रैल में आता है गुच्छी का सीजन
गुच्छी का मुख्य सीजन आम तौर पर मार्च और अप्रैल माना जाता है। अनुकूल मौसम में सर्दियों के बाद जंगलों में इसके निकलने की शुरुआत होती है। इसकी प्राकृतिक पैदावार सीमित अवधि के लिए होती है, जिसके कारण इसे समय रहते जंगलों से एकत्र करना पड़ता है।₹25 हजार से ₹40 हजार किलो तक कीमत
गुच्छी की कीमत इसकी गुणवत्ता, आकार, रंग, नमी और उपलब्धता के आधार पर बदलती रहती है। 2026 में अच्छी गुणवत्ता वाली सूखी गुच्छी की कीमत लगभग ₹25,000 से ₹40,000 प्रति किलो तक बताई गई है। वहीं कुछ बाजारों में विशेष गुणवत्ता की गुच्छी इससे भी अधिक कीमत पर बिक सकती है।
कितनी होती है पैदावार?
गुच्छी की हिमाचल प्रदेश की कुल सालाना पैदावार का कोई एक भरोसेमंद, नियमित आधिकारिक आंकड़ा उपलब्ध नहीं है। इसकी वजह यह है कि यह खेती के खेतों में बड़े पैमाने पर पैदा होने वाली फसल नहीं, बल्कि मुख्य रूप से जंगलों से मिलने वाला जंगली मशरूम है। इसकी उपलब्धता हर साल मौसम और प्राकृतिक परिस्थितियों के अनुसार बदलती रहती है। इसलिए इसकी पैदावार के बारे में निश्चित संख्या बताने के बजाय इसे दुर्लभ और सीमित प्राकृतिक उपज कहना अधिक सही होगा

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